मन के दरवाजे खोल जो बोलना है बोल

मेरे पास आओ मेरे दोस्तों, एक किस्सा सुनाऊं...

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sumityadav


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उपवास प्रायश्चित का (व्यंग्य)

Posted On: 18 Apr, 2013  
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होली व्यंगिकाएं

Posted On: 26 Mar, 2013  
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बुरा मानेंगे, होली है!

Posted On: 26 Mar, 2013  
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कोलगेट करो, दातून से डरो (व्यंग्य)

Posted On: 14 Sep, 2012  
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चांद पे जा रे, चांद के प्यारे (व्यंग्य)

Posted On: 10 Jul, 2012  
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मध्यम कुमार ‘मध्यस्थ’

Posted On: 26 Apr, 2012  
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ग्राम सुर+आज अभियान लाईव (व्यंग्य)

Posted On: 21 Apr, 2012  
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आवश्यकता है मूर्खों की…. (व्यंग्य)

Posted On: 1 Apr, 2012  
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कुर्सी लत मोहे ऐसी लागी….. (व्यंग्य)

Posted On: 25 Mar, 2012  
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होली ठिठोली (व्यंग्य कविताएं)

Posted On: 7 Mar, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: jlsingh jlsingh

नत्थू चाचा से मिल रहे ज्ञान को मैं बड़े ध्यान से सुन रहा था। मैंने आगे पूछा- चाचा, कोल ब्लॉक पर आपका क्या कहना है? चाचा बोले- कोल ब्लॉक के तो क्या कहने। इस कोल ब्लॉक ने तो कईयों के किस्मत को अनलॉक कर दिया पर देश की गाड़ी को ब्लॉक कर दिया है। देखो पूरा सत्र निकल गया पर संसद चली ही नहीं। एक जोरदार ठहाका मारते हुए मैं बोला- अरे चाचा, माना संसद का आकार गाड़ी के चक्के की तरह है, पर वो चलती थोड़ी है। खिसियाए चाचा बोले- अरे आधुनिक युग के पुरातन प्राणी मेरा मतलब है संसद चलेगी कैसे, कांग्रेस एक्सीलेटर बढ़ा रही है पर भाजपा ब्रेक दबाए बैठी है, कुछ पार्टियां चक्के पंक्चर करने में भिड़ी है। वहीं मुलायम सिंह कभी स्टेफनी लिए हाथ में दिखते हैं, तो कभी कील। उन्होंने दोनों विकल्प खुले रखे हैं, जरुरत पड़ी तो स्टेफनी बन जाएंगे नहीं तो सरकार की गाड़ी पंक्चर कर देंगे। इस एक्सीलेटर-ब्रेक के घमासान में देखो देश का इंजन जल रहा है। आज बिलकुल नया रूप देखा , सुमित जी आपकी लेखनी का ! क्या गज़ब का हास्य लिखा है ! बहुत बढ़िया

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा:

के द्वारा: manjusharma manjusharma

के द्वारा: sumityadav sumityadav

आपके द्वारा प्रशंसा पाकर मेरा यह प्रयास सफल हुआ मधुरजी। क्या करें जमाने का चलन देखकर दुख भी होता है कि लोग किस प्रकार खुशी खुशी मूर्ख बनते हैं। अब हिंदी को ही लें। हिंदी बोलने में आजकल बहुतों को ऐसे शरम आती है जैसे कोई महापाप कर दिया हो और अंग्रेजी को बड़ी शान से बोलते हैं। क्या इतना भी पता कि जो अपनी मातृभाषा की इज्जत नहीं करते उनसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं। एक अंग्रेज बड़ी शान से अंग्रेजी बोलता है, चीनी चीनी भाषा बोलता है, फ्रेंच व्यक्ति फ्रेंच बोलता है क्योंकि यह उनकी मातृभाषा है। लेकिन हिन्दुस्तानी हिन्दी बोलने से पहले सोचते हैं,,,,, इससे बड़ी मर्खता का प्रमाण क्या होगा। उदाहरण अनंत हैं.... इन्हें किसी और व्यंग्य में सामने लाऊंगा। आपका आभार।

के द्वारा: sumityadav sumityadav

के द्वारा:

एक अच्‍छी प्रस्‍तुति । लेखनी में आ रही है धार । इन्‍ही टिप्‍पणियों में मिश्र जी का कहना सही है ये तो हमारी नि‍यति है कि हम जब तक कुछ विदेशियों जैसा न कर लें तब तक चैन नहीं मिलता । डॉलर व पाउंड कटे हुए है तो रूपयें का चिन्‍ह क्‍यों ना कटा हुआ हों । देखने में उनके भाई जैसा लगेगा । आपके व्‍यंग्य में से टीचर की बात ज्‍यादा सटीक है - बस उसी तरह सरकार ने रुपए का चिन्ह (मोनो) बना दिया है ताकि आम जनता रुपए के चिन्ह को देखकर ही खुश हो ले कि हमारा देश बहुत तरक्की कर रहा है और इसका आर्थिक तंत्र बहुत मजबूत है वगैरह-वगैरह ।पर न तो महंगाई कम होने वाली है न टमाटर-सब्जी-तेल के दाम कम होंगे। न तो रिश्वतखोरी रुकने वाली है न भ्रष्टाचार। इसलिए फालतू सवाल पूछना बंद करो और अपनी पढ़ाई करो वरना तुम्हारे रिजल्ट पर चिन्ह होगा “फेल” का।” अरविन्‍द पारीक

के द्वारा:

rajniti karaey walo ki bhi ek kala hai aur gar unkey ghar meay kisi i deat ho jae tab jab election nazdi hotey tab rajneta itna bahabhook ho jaata dekh kar hansi aati abhi unki mataji jab hospital meay ja rahi tab unkey pass time nahi tha per election mazboori bas unhey dookh pase karna pad raha aur sab se jayada unlogo ko dekhkar jo kabhi unki unki mata ji se anhi milley jab unki vichardhare kis taherey se prakt kartey jaise wohi netaji ke sagey bhai hon apne parivar koi sankat aaye unhey koi parvaha nahin unhey maloom hain netaji ke maa ke atim karykarm ke ghar netaji apna dookh bhoolkar unke ghar dhook aakar prakt kardengey aur netaji jity tab unka nteaji soch kar bhala kardeynegey dekho apni bimar patni ko bholkar meri maa ke kriyakarm per kitna royadhoya hamra farz bhi iskeliye hai per ussey kaya pata yeh khhudgarz neta kitna dhookh dega maa ke kriya karm hotey hi bimar ka bahna banna dala aur apne karyakarta se boley kya karron chalta zaroor per meri halat khud kharab hai tum dhokhi mat ho hum puri party ko itla kardety hain tmhre dhookh meia saath degi uske baad unmahashay ke samjh meay aai iss jaha meay iss rajniti eay apna koi nahi chalo apne ghar pahaley chaloon per dekha wahhan dusri party ke netta unki patni ke marney ka dhokh parkat karrahe hain usko chainmila udhar netaji election haar gaye saamney se unki patni aagyi bole kash aur bhi dookh ghata hojati dil se pyara koi marjta kum se kum election na harjata mere se achha wohi manggu raha uski biwi ke marney se oposition ka netaji haargaya kash tum mereliye itna bhi na karski yeh maa thi jo iss samay margayee barna meri zamnat jabt ho jati dhany hai maa tune martey martey apne bete ki izaat rakhli........

के द्वारा:

सुमित जी एक अच्छे व्यंग लेख के लिए बधाई .............. सुमित जी जैसा की मैंने अनुभव किया है की आज के परिवेश में दुनिया का हर व्यक्ति बिना कुछ किये ही सब कुछ पाने की इच्छा रखता है, और मानव की इसी प्रकृति ने उसे सफलता और लोकप्रियता के सरल उपाय प्राप्ति के लिए प्रेरित किया है ..................... और अपनी इन्ही विकृत प्रवित्तियों के कारण आज मानव अन्धविश्वाशी होता जा रहा है, उदाहरण और इस बात की पुष्टि के लिए प्रतिदिन हमें ऐसे समाचार मिलते रहते हैं ................ और जैसा की आपने भी अनुभव किया होगा की आज ये मात्र भारत या एशियाई देशों की समस्या नहीं है, अपितु ये वैश्विक समस्या का रूप लेती जा रही है ................. इसक एक और सबसे बड़ा कारण ये है की मानव अपनी कार्यक्षमताओं में विश्वाश खोता जा रहा है, और उसे पल प्रतिपल किसी चमत्कार की प्रतीक्षा रहती है ............................ लोग ये भूल गए हैं की कर्म प्रधान है, भाग्य की नौका में सवार होकर चमत्कारों की प्रतीक्षा करने और ईश्वर को नाविक बना देने से सागर नहीं पार किया जा सकता है ! इसके लिए जरूरी है की हम स्वयम में नाविक के गुण का विकास करें... और विपत्ति में धैर्य और कर्म योग का सहारा लेकर जीवन के सागर की यात्रा पर निकलें...................... लोगों को सही रास्ते पर लाने के माध्यमों में आलोचना, शिक्षा और आत्मसात करके प्रस्तुत किये गए उध्वहरणों का योगदान प्रमुख होता है ...................... आपलोग इसी तरह से आलोचनाओं से इस दिशा में सार्थक प्रयाश करते रहें ........

के द्वारा: Shailesh Kumar Pandey Shailesh Kumar Pandey

अपने ऊपर लिख गए व्यंग्य को पसंद करने एवं इतनी बड़ी टिप्पणी देने के लिए शुक्रिया मिश्राजी। क्या करें मिश्राजी आपका फोटो लगाना न लगाना बहुत दिनों से चर्चा का विषय था। परसों आपकी फोटो देखी तो सोचा कि बस इस पर एक व्यंग्य तो लिखा ही जाना चाहिए इसलिए पेट्रोल में मूल्य वृद्धि पर व्यंग्य छोड़कर आप पर ही तत्काल व्यंग्य लिख मारा। और जहां तक हसीन दिखने की बात है तो सरजी लड़के कभी हसीन नहीं होते वो हैंडसम होते हैं। और आप तो अच्छे खासे दिखते हैं। हां पत्नी पीड़ित वाली बात अधिकांश पतियों पर फिट ही बैठती है। खैर हम तो अभी इस प्रताड़ना से बचे हैं लेकिन गर्लफ्रैंड से हम भी कम प्रताड़ित नहीं होते और हमारे घरवाले तो कुछ सालों में हमारी शादी करवाकर हमें स्थायी रूप से प्रताड़ित करवाने की ठान चुके हैं।

के द्वारा: sumityadav sumityadav

मोर बप्पा रे । इत्ता बड़ा व्यंग्य लेख मेरे ऊपर । अब इतना भी हसीन नहीं हूं मैं । यह फोटो मेहनत करके नहीं खिंचवायी है बल्कि 15 साल पुरानी फोटू है । तब हम अपनी राय में बम्पर हसीन हुआ करते थे लेकिन हसीनाओं को हमारी खूबसूरती से इत्तेफाक नहीं था । खुराना जी कहानी की तरह निरे 24 कैरेट के बेवकूफ थे । खिलाड़ी होते तो अपनी भी कोई कहानी होती । वर्तमान की फोटू में तो खाये पिये मुटाये कोहड़ा लगते हैं । खैर । एक बात तो सुमित तुमने एक दम सही ताड़ी कि हम पत्नी पीड़ितों में से हैं । कल रात 12 बजे तक नेट पर बैठा था । तुम्हारी भाभी ने ऐसी डांट लागाई की दिन भर काम धंधे पर लगे रहे । रात साढ़े दस बजे नेट खोला तो पता लगा कि तुमने हमारी शान में एक खूबसूरत व्यंग्य लिख मारा है । तुम पहले ही डिसाइड कर लिये थे कि मिश्राजी के चेहरे पर एक व्यंग्य चिपकाना है । लेखक को कौन रोक सकता है । कोई इमरजेंसी तो लगी नहीं है । एक बार मेरे एक दोस्त ने मुझ पर एक कविता लिखी थी । आज मुझ पर आपने एक व्यंग्य भी लिख दिया । उम्मीद करता हूं कि अब कोई मेरे पर पीएचडी भी कर लेगा । सुमित बाबू किस मुंह से आपको धन्यवाद दूं । उसी मुंह से आपको आभार वयक्त कर रहा हूं जो कि ब्लाग पर बेवजह मुसकुरा रहा है । वाकई में बहुत बड़िया व्यंग्य लिखा है । (मुझ पर लिखा है तो बढ़िया होगा ही ।) धन्यवाद । ब्लाग पर फोटू अपलोड करने का पूरा श्रेय चातक जी को है जिनकी महती सलाह से यह फोटो अपलोड हुआ है । उनको भी बहुत बहुत धन्यवाद ।

के द्वारा: kmmishra kmmishra

के द्वारा: rajkamal rajkamal

के द्वारा:

के द्वारा: Nikhil Nikhil

के द्वारा: kaushalvijai kaushalvijai

के द्वारा: ajaykumarjha1973 ajaykumarjha1973

बहुत खूब सुमित जी । अच्छी रचना है । सच बता रहा हूं । बहुत कोशश के बावजूद भी मैं कविता नहीं लिख पाता हूं । कवि होना एक सुंदर, निश्छल और कोमल हृदय की निशानी होती है । कवि का भावुक हृदय प्रेम से लबालब होता है । अदिति जी का बड़प्पन है जो उन्होंने मुझे इस काबिल समझा । मैं तो अभी खुद ही व्यंग्य विधा का अदना सा विद्यार्थी हूं । हास्य व्यंग्य समझने के लिये आपको व्यंग्य सम्राट हरिशंकर परसाई, शरद जोशी, श्री लाल शुक्ल, रविन्द्र नाथ त्यागी की रचनाएं पढ़नी चाहिये । आप मेरे दूसरे ब्लाग "सुदर्शन" पर आयें । (www.kmmishra.tk ) इसके एक अलग पेज "हिन्दी की श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ" पर मैंने इन महान व्यंगकारों की रचनाएं रखी हुयी हैं । आपको उन्हें पढ़ कर आनंद भी आयेगा ओर कुछ दृष्टि भी मिलेगी ।

के द्वारा: kmmishra kmmishra




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