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“एक आदमी मच्छर को………”

Posted On: 7 Jun, 2010 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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mosquitoमनुष्य और मच्छरों का संबंध आदिकाल से रहा है। जब पहली बार मनुष्य सोया बस तब से ही मच्छरों ने मनुष्य के सिर पर भिनभिनाना और खून चूसकर उसकी नींद हराम करना शुरू कर दिया था। मनुष्य ने कई तरीके आजमाए मच्छरों को अपने से दूर करने के लेकिन मच्छरों का मनुष्यों के प्रति प्रेम और प्रगाढ़ होता गया। मनुष्य जंगल छोड़कर शहर आए तो मच्छर भी शहर आ धमके। मनुष्य ने मच्छर अगरबत्ती, कॉइल, स्प्रे से लेकर न जाने क्या-क्या उपाय नहीं किए मच्छरों को अपने से दूर करने के लेकिन मच्छर दुगुनी ताकत के साथ पलटवार करते हुए मनुष्य का खून चूसते रहे। कॉइल, स्प्रे झेल-झेलकर मच्छर इतने ढीठ हो गए कि आखिर में मनुष्य ने हार मान ली और मच्छरों को अपने घर का सदस्य ही मान लिया।

कहते हैं कोई भी प्राणी एक-दूसरे के साथ लंबे समय तक जुड़े रहें तो दोनों के बीच गुणों का आदान-प्रदान हो जाता है, तो मनुष्य और मच्छरों में भी गुणों का आदान-प्रदान होना लाजिमी था। मनुष्य ने मच्छरों से चूसने का गुण सीखा और इतने अच्छे से सीखा कि सब एक-दूसरे का खून चूसने में लगे हैं। मालिक नौकर का खून चूस रहा है, अमीर गरीब का, ताकतवर कमजोर का, नेता जनता और लोकतंत्र का खून चूस रहे हैं। जिसे जहां जैसे मौका मिले बस लगा है खून चूसने में। ये तो वो गुण था जो मनुष्य को मच्छरों से मिला,  अब बात करते हैं मच्छरों की। इतने लंबे समय से मनुष्य के साथ रहने से मच्छरों में भी मनुष्य के कुछ गुण (अर्थात अवगुण) तो आए ही होंगे। बस यहीं से मच्छर जगत में हाहाकार मच गया।

मच्छरों में मानवीय गुण आते ही मच्छरों की एकता भंग हो गई। कुछ मच्छर बागी नेताओं का खून पीकर आ गए और उनमें भी बागी गुण आ गए। अब वे वापस आकर मच्छरों के पीएम की सरकार गिराने में लग गए। मच्छरों का पीएम समझ गया कि ये बागी नेता का खून पीकर आ गये हैं इसलिए बौरा रहे हैं। उसने उन बागी मच्छरों को डॉ.मच्छर के पास भेज दिया। उस डॉ.मच्छर ने भी भ्रष्ट डॉक्टर का खून पिया था और उसमें वे वैसे ही गुण आ गए थे। वो भी अब इलाज करने के बहाने ज्यादा पैसे ऐंठने लगा और पेट में दर्द होने पर आपरेशन कर किडनी निकालने में माहिर हो गया था। बागी मच्छरों में अब तक नेता के तमाम गुण आ गए थे। उन्होंने डॉ.मच्छऱ को सेट कर उसे मंत्री पद का लालच दिया और पीएम को पागल करार देने को कहा ताकि सरकार गिर जाए। लेकिन मच्छरों के पीएम ने भी पहुंचे हुए जुगाड़ू नेता का खून पीया था, उसने पहले ही उन बागी नेताओं और डॉक्टर को ठिकाने लगा दिया। और अपनी सरकार बचाने के लिए उन मच्छरों से हाथ मिला लिया जिनसे वो कल तक नजरें भी नहीं मिलाना चाहता था। जुगाड़ू नेता का खून चूस-चूसकर वो भी कुर्सी की राजनीति करने में माहिर हो चुका था।

अब महिला मच्छरों का हाल सुनिए। महिला मच्छरों ने सास-बहू सीरियल में काम करने वाले अभिनेत्रियों का खून  चूस लिया बस तब से वे भी साजिशें करने में जुट गई। अब इंसानों का खून चूसना उनका मकसद नहीं रहा अब वे एक दूसरे का खून चूसने का ही मौका तलाशती रहतीं। मच्छर सास मच्छर बहू को नीचा दिखाने में लगी रहती तो मच्छर बहू सास को ऊपर भेजने की साजिश  करती।

मच्छरों में मानवीय गुणों (अवगुणों)  के आते ही मच्छऱ समाज तहस नहस हो गया। उच्च वर्ग के मच्छर निम्न वर्ग के मच्छरों का हक मारने लगे तो निम्न वर्ग के मच्छर भी कम नहीं थे, वे भी आरक्षण के लिए आंदोलन करने में भिड़ गए। पहले मच्छर आजादी के साथ इंसानों का खून पीते थे पर अब खून कोटे से मिलने लगा। भ्रष्ट मच्छरों ने इसमें रिश्वतखोरी करना चालू कर दिया। अब खून पीने के लिए इन भ्रष्ट मच्छरों को रिश्वत देना पड़ता था। मच्छरों में भी जलन, ईर्ष्या की भावना आ गई थी और वे एक-दूसरे का ही खून पीने लगे। कुछ चोर-डकैत और भाई टाईप के मच्छर भी पैदा हो गए जो मच्छरों का ब्लड बैंक, वही बैंक जहां पर मच्छरों ने इतना सालों से इंसान का खून चूस-चूसकर जमा किया था, को लूटने लगे। भाई टाइप के मच्छर आम मच्छरों से हफ्ता वसूलने लगे।

वहीं मिलावटखोर दुकानदार मच्छर खून में पानी मिलाकर मच्छरों को बेचने लगे, इससे मच्छरों के स्वास्थ्य में भारी गिरावट आई और पहले के मुकाबले वे कमजोर हो गए। अब वे पहले की तरह फुर्ती से मनुष्यों के सर पर भिनभिनाकर भाग नहीं पाते थे और अब तो कोई मरियल आदमी भी उनको मार देता था। मच्छर भी अब मनु्ष्यों की तरह आरामपरस्त हो गए थे इस कारण जो मच्छऱ बीमारी फैलाने में माहिर थे अब खुद ही बीमारी के शिकार होने लगे। वे अब उड़कर इंसानों का खून पीने के बजाए बोतल से खून पीने लगे। खून पी-पीकर वे मधुमेह के रोगी बन गए। इससे भ्रष्ट डॉक्टर मच्छरों की चांदी हो गई और उनके अस्पताल हरे-भरे हो गए।

युवा मच्छरों की तो बात ही निराली थी। युवा मादा मच्छरों ने जब से करीना कपूर का खून पीया बस तब से वे भी जीरो फिगर की दीवानी हो गई। वे भी बस अब स्लीम ट्रिम होने में जुट गई। युवा नर मच्छरों ने भी सलमान, ऋतिक जैसे हीरो का खून पीया था। बस वे भी लग गए बॉडी बनाने में ताकि मादा मच्छरों को रीझा सकें। एक वृद्ध मच्छर जिसने इंसानों का खून न पीने की कसम खाई थी ताकि उसमें उसके गुण न आए, कोने में चुपचाप बैठे यह सब देख रहा था। मच्छरों के इस हाल से वो क्षुब्ध था। लेकिन आज उसने भी अपने कसम तोड़ दी और ऐसे बुड्ढे का खून पी लिया जिसमें आज भी जवानी कूट-कूटकर नहीं ठूंस-ठूंसकर भरी थी। अब उसे भी इस उम्र में शादी करने का चस्का लग गया और वो निकल पड़ा मेट्रीमोनी साइट्स को सर्च मारने।

मच्छरों का यह हाल देखने के बाद अब कु्त्ते, बिल्लियों, गायों आदि जानवर काफी सहमे हुए थे। वे अब इंसानों के साथ नहीं रहने चाहते थे। उन्होंने इंसानों से यह सोचकर दूरी बना ली कि इंसानों के साथ रहकर मच्छरों का यह हाल हो गया है। अगर हम भी कुछ समय और इंसानों के साथ रहे तो हम में भी इसके गुण आ जाएंगे। इसलिए इंसानों से दूर रहने में ही भलाई है….।

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Raj के द्वारा
July 21, 2010

सही कहा सुमित भाई, चारो तरफ़ है लूट मची, तू भी जी भर लूट इससे पहले तू लुट जाए, ले तू सबको लूट । राज

    sumityadav के द्वारा
    July 21, 2010

    राज भाई क्या करें सब जगह लूट मची है चाहे मानव जगत हो या मच्छर जगत।  दो ही रास्ते हैं या तो लुट जाओ या लूट लो। हमने तो बहुत लुटाया है भाई अब लूटने की बारी है। आओ दोनों भाई साथ मिलकर लूटेंगे।

nikhilbs09 के द्वारा
June 8, 2010

बहुत ही बदिया लिखा है यार… सचमुच मच्चार और इंसान ने एक दुसरे सा गुड़ों की अदला बदला क्र ली है… ऐसे ही लिखते रहिये… धन्यवाद, निखिल singh, http://jarjspjava.jagranjunction.com

    sumityadav के द्वारा
    June 8, 2010

    धन्यवाद। सच तो है मच्छरों का तो पता नहीं लेकिन मनुष्य ने जरूर मच्छरों की तरह खून चूसना शुरू कर दिया है। बस आगे और अच्छा लिखने की कोशिश करता रहूंगा। प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।

aditi kailash के द्वारा
June 7, 2010

सुमित जी, अच्छा व्यंग्य हैं…….काफी हंसाया आपने………बधाई………

    sumityadav के द्वारा
    June 7, 2010

    अदितीजी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। दरअसल आपकी सलाह से मेरा यह व्यंग्य और बेहतर हुआ है।


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