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मार डाला शुद्ध घी ने...

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ghee 256

शुद्ध घी खाकर वृद्ध की मौत, शुद्ध घी के सेवन से सैंकड़ों बीमार। चौंक गए क्या। अरे ये मैं नहीं, बल्कि अखबारें बोल रही हैं। सारे अखबार बस इसी तरह के शीर्षकों से अटे पड़े हैं। अब जो अशुद्ध खाने का आदि हो उसे अगर शुद्ध चीज खिला दी जाए तो तबीयत तो खराब होगी ही। अशुद्ध चीजें पचाने की आदि अंतड़ियां शुद्ध चीज कहां से पचा पाएंगी। ये मिलावट का युग है। मिलावट ही सत्य है, मिलावट ही सर्वत्र है। आज मिलावट फैशन है और पैशन भी। जो मिलावटी नहीं वह आउटडेटड है। बदलते जमाने के साथ शुद्ध गंगा नदी ने भी अपने आपको अपडेट कर लिया और अशुद्ध हो गई। आप हाथ में गंगाजल लेकर तर्पण करते हैं, लेकिन हाथ में गंगाजल छोड़कर सब कुछ आ जाता है मसलन, कचरा, तेल, हेयरपिन, बासी फूल, विसर्जित किए गए मूतिर्यों के अवशेष सब कुछ। ऐसा लगता है मानो सारा संसार हाथों में आ गया है। अब सरकार भी मिलावटी बनती हैं मतलब मिली-जुली। साफ-सुथरी सरकार अब चलन के बाहर हो गई हैं, अब तो दागी नेताओं की सरकार है। जनता ने भी इस मिलावट को अब स्वीकार कर लिया है। बिना मिलावट की गई चीजें तो अब हम हमको जमती ही नहीं । जब तक दूध में पानी न हो दूध का मजा नहीं आता। भूसे मिले चायपत्ती के बगैर चाय बेस्वाद लगती है। मिलावटी तेल में सिके हुए पूड़ी और तले हुए पकौड़ों की तो बात ही क्या। बच्चा भी पैदा होते ही अब मां का दूध नहीं पीता बल्कि बोतलबंद सोया दूध पीता है।

इन अशुद्ध चीजों के बीच सबकी जिंदगी मजे से गुजर ही रही थी, पर पता नहीं कहां से मार्केट में शुद्ध घी आ गई। इस शुद्ध घी के अचानक टपकने से लोगों में हाहाकार मच गया। सब को डर सताने लगा कि कहीं शुद्ध घी खाकर वे बिस्तर न पकड़ लें। कुछ खुरापाती किस्म के लोगों ने शुद्ध घी का नायाब इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। बहू अपनी सास को शुद्ध घी से बने पकौड़े खिलाने लगी ताकि वह जल्दी स्वर्ग सिधार जाए। आफिस में एक कर्मचारी अपने विरोधी कर्मचारी को रास्ते से हटाने के लिए उसे शुद्ध घी से बुने लड्डू खिलाने लगा। स्कूल में एक बच्चे ने अपने जन्मदिन पर टीचर को शुद्ध खोवे से बनी मिठाई खिला दी ताकि टीचर ५-६ दिन के लिए बिस्तर पकड़ ले और होमवर्क से मुक्ति मिल जाए।

दिन ब दिन शुद्ध घी से बीमार लोगों की संख्या बढ़ने लगी। हॉस्पीटल हाऊसफुल होने लगे। छुटभैये और झोलाछाप डॉक्टरों की भी निकल पड़ी। एक डॉक्टर अपने मरीज से कहता है- अजी शुक्र है आपने ८० प्रतिशत शुद्ध घी से बना लड्डू खाया था इसलिए बच गए, कहीं १०० प्रतिशत शुद्ध घी वाला लड्डू खाया होता तो स्वर्ग सिधार गए होते। जरा देखकर खाया कीजिए आजकल मार्केट में शुद्ध घी आ गई है। पत्नी अपने पति से बोली- देखा जी, इसलिए कहती हूं दूर रहा करो उस रमेश से, जरूर उसी ने आपको शुद्ध घी का लड्डू खिलाया होगा, वो आपसे जलता जो है। मैं आज ही शुद्ध घी के पकौड़े बनाती हूं आप इसे राजेश को खिलाकर उसको सबक सिखाना।

ghee1शुद्ध घी ने इतनी दहशत फैला दी कि लोग दुकानदारों को शक की नजरों से देखने लगे। जो दुकानदार दशकों से अपनी मिलावट कला से लोगों की सेवा करते आए थे, अब शक के दायरे में आने लगे। लोगों को शंका होने लगी कि कहीं ये दुकानदार उन्हें शुद्ध घी न पकड़ा दें। गली-मोहल्ले, चौक-चौराहों पर बस इसी बात के चर्चे थे कि आखिर ये शुद्ध घी अचानक आया कहां से? कुछ ने कहा इसमें अंडरवर्ल्ड का हाथ होगा। कुछ को इसमें पाकिस्तान के साजिश की बू आने लगी। तालिबान को जैसे ही शुद्ध घी के आतंक के बारे में पता चला उसने शुद्ध घी से तबाही मचाने की सोची। आतंकवादियों ने सोचा बंदूक और खून खराबा करके हम ५०-१०० लोगों को मार पाते हैं लेकिन लोगों को शुद्ध घी खिलाकर एक बार में ही ५-१० हजार लोगों का काम तमाम कर देंगे। तालिबान ने तत्काल रामू, भोला, बंसी, दुकालू के यहां की १००० गायें अपहरण कर ली। अब आतंकवादियों ने बंदूक छोड़कर डेयरी खोल ली और गायों का दूध दुहकर शुद्ध घी बनाने लगे। शुद्ध घी के किस्से अमेरिका तक भी पहुंच चुके थे। तब अमेरिका ने अपने नया परमाणु बम बनाने का कार्यक्रम रोककर शुद्ध घी बम बनाने का कार्यक्रम शुरू कर दिया। अमेरिका को इसके लिए गायों की जरूरत थी। जिस तरह तेल के लिए उसने इराक पर हमला कर दिया था उसी तरह अब वह गायों के लिए भारत की तरफ देखने लगा। हमारी कमजोर लड़खड़ाती सरकार न पहले अमेरिका के दबाव के आगे कुछ कहती थी और न अब उसने कुछ कहा।

शुद्ध घी के आतंक से लंबे समय से सुस्त एवं निर्जीव पड़े विपक्ष के नेताओं को एक मुद्दा मिल गया जिसे वे चुनाव में भुना सकते थे। विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे को खूब उछाला और सरकार की खूब मिट्टीपलीद की। विपक्ष के एक जोशीले नेता ने ऊंचे स्वर में कहा- शुद्ध घी का बाजार में आना जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ है। आज के मिलावटी युग में अगर कोई शुद्ध चीज आ जाएगी तो गड़बड़ तो होगी ही ना। अब हम सारे दागी नेताओं के बीच अगर कोई सच्चा, सज्जन नेता आ जाएगा तो राजनीति प्रदूषित होगी ही ना, पूरा समीकरण बिगड़ जाता है। मुझे तो शुद्ध घी के बाजार में आने के पीछे केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री का हाथ लग रहा है। उन्हीं के संरक्षण में चल रही डेयरियों से शुद्ध घी के सप्लाई की खबरें आ रही हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। केन्द्रीय गृहमंत्री ने इसके लिए समिती बना दी। समिति बनाना सभी मुद्दों का रामबाण इलाज है। कोई मुद्दा हो, बस जांच समिति बना दीजिए, ४-५ महीने या फिर साल फुर्सत। गृहमंत्री ने भी इसी रामबाण इलाज का प्रयोग करते हुए समिती बना दी।

जिस तरह छल, कपट, राग, द्वेष के युग में सत्य, धर्म, निष्ठा अपना स्थान नहीं बना सकती। उसी तरह अशुद्ध माहौल में शुद्ध चीजें कहां से अपना स्थान बना पाती। कुछ समय तक शुद्ध घी ने अपने आप को समाज में बनाए रखने की कोशिश की लेकिन लोगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया और उसे अशुद्ध करने के लिए जुगाड़ जमा ही लिया। कुछ समय तक शुद्ध घी से आतंकित लोग फिर अपनी जिंदगी में लौट आए। बाजार में अब शुद्ध घी का नामोनिशान नहीं है। मैंने यह व्यंग्य बिस्तर पर पड़े-पड़े लिखा क्योंकि मेरे हास्य व्यंग्य से जलने वाले मेरे एक मित्र ने मुझे उस समय शुद्ध घी के लड्डू खिलाकर बिस्तर पर पटक दिया था। खैर अब मैं चलता हूं उसी मित्र के पास उसे शुद्ध घी का हलवा खिलाकर उसका हाजमा जो खराब करना है, ये शुद्ध घी मैंने खास उसी के लिए बचाकर रखा था सबक सिखाने के लिए। आप लोग भी बचकर रहिएगा कहीं शुद्ध घी आपके शहर में आतंक न मचाने लग जाए।

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R K Khurana के द्वारा
June 14, 2010

सुमित जी आपका व्यंग पढ़ कर मुझे भी शुद्ध चीज़ों से डर लगने लगा है ! बहुत अच्छा लिखा है ! साधुवाद ! राम कृष्ण खुराना

    sumityadav के द्वारा
    June 14, 2010

    खुराना जी, आपको यह व्यंग्य पसंद आया, आपको मेरा आभार। बस आपके ही सलाहों पर अमल करते हुए अपने लेखन में सुधार करता जा रहा हूं। आपकी प्रतिक्रियाएं मेरे लिए अनमोल हैं। बस इसी तरह मेरा मार्गदर्शन करते रहें। धन्यवाद।  शुद्ध चीजों से तो डरना ही पड़ेगा, अशुद्ध की आदत जो हो गई है।

aditi kailash के द्वारा
June 14, 2010

ये पोस्ट पढ़ कर लगा हमने तुममे गलत नहीं देखा था और अब विश्वास हो गया कि आम पकने लगा है……..बहुत खूब……शायद बहुत खूब भी छोटा शब्द है……..इसी तरह लिखते रहो….बधाई…….

    sumityadav के द्वारा
    June 14, 2010

    अदितीजी, आपको मेरा यह व्यंग्य अच्छा लगा एवं आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार। मैं जब भी पोस्ट लिखता हूं आपके, मिश्राजी एवं अन्य वरिष्ठ ब्लागर्स की प्रतिक्रियाओं का हमेशा इंतजार करता हूं ताकि खुद में और सुधार कर सकूं। मैं तो अभी कच्चा आम हूं आप लोगों के सान्निध्य में रहकर पक रहा हूं। आप लोगों की प्रतिक्रियाओं की वजह से मैं और बेहतर लिख पा रहा हूं और आगे भी लिखूंगा। आपके द्वारा लिखित रचनाओं से मुझे प्रेरणा  एवं मार्गदर्शन मिलता है। धन्यवाद।

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    तुमने तो हमें वरिष्ट बना दिया……हमने भी तुमसे १०-१२ दिन पहले ही ब्लॉग की दुनिया में कदम रखा है……..अभी एक महिना भी नहीं हुआ है…….

    sumityadav के द्वारा
    June 14, 2010

    आपने भले ही मुझसे से 10-12 दिन पहले जागरण जंक्शन ज्वाइन किया हो लेकिन जागरण जंक्शन में आपको टीचर दीदी यूं ही नहीं कहा जाता। वरिष्ठता इससे नहीं होती कि आपने कब से लिखना शुरू किया बल्कि इससे कि आप क्या लिखती हैं और दूसरों को कितना प्रेरित करती हैं। तो आप मानें या न मानें आप वरिष्ठ तो हो ही गईं।

Arvind Pareek के द्वारा
June 14, 2010

शुद्धता की बात की और सबको डरा दिया । लिखा आपने कुछ ऐसा जो मन को भा गया । अच्‍छी प्रस्‍तुति के लिए बधाई । अरविन्‍द पारीक

    sumityadav के द्वारा
    June 14, 2010

    अरविंद जी, आपको मेरा व्यंग्य पसंद आया आपका आभार। धन्यवाद। हमारा मकसद डराना नहीं था।  आज के युग में इतनी अशुद्धता फैल गई है कि शुद्धता के लिए जगह ही नहीं है।

kmmishra के द्वारा
June 14, 2010

क्या बात है सुमित बाबू । आप तो हास्य व्यंग्य की पटरी पर राजधानी की रफ्तार से दौड़ने लगे । बड़ा ही जोरदार व्यंग्य लिखा है आपने । मेरी दुकान बंद कराने का तो इरादा नहीं है आपका । सफल व्यंग्य लेखन के लिये बधाई ।

    sumityadav के द्वारा
    June 14, 2010

    मिश्रा जी, आपके और अदितीजी के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन से ही मैं बेहतर लिखने का प्रयास कर रहा हूं। आपको मेरा यह व्यंग्य पसंद आया एवं आपके अमूल्य प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार। मिश्राजी, आपकी तो व्यंग्य की फैक्ट्री है मैंने तो बस हास्य-व्यंग्य की छोटी सी दुकान खोली है। जागरण जंक्शन पर आपसे बेहतर व्यंग्य कोई नहीं लिखता।

kaushalvijai के द्वारा
June 14, 2010

bahut badhiya aaj ke parives me.

    sumityadav के द्वारा
    June 14, 2010

    कौशल जी आपको यह व्यंग्य पसंद आया इसके लिए आपका आभार। धन्यवाद


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