मन के दरवाजे खोल जो बोलना है बोल

मेरे पास आओ मेरे दोस्तों, एक किस्सा सुनाऊं...

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अहसास (कहानी) -वेलेंटाइन Contest

Posted On: 14 Feb, 2011 Others में

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Valentine-Couple-286743हाय! मैं हूं रोहन, रायपुर से। सबसे पहले थैंक्स एक अनजाने की दोस्ती कबूल करने के लिए। रोहन ने फेसबुक में जुड़ी नई दोस्त निशा से कहा। दूसरी तरफ से जवाब आया- आपकी प्रोफाइल देखी आप मुझे भले लगे इसलिए आपकी फ्रैंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की। वैसे मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने की आपको कैसे सूझी? रोहन बोला- जी कुछ नहीं, स्मिता मेरी दोस्त है उसी के फ्रेंड लिस्ट में आपको देखा तो आप मुझे बहुत अच्छी लगी, आपसे दोस्ती करनी थी तो आपको रिक्वेस्ट भेज दिया। दोस्ती कबूल करने के लिए एक बार फिर शुक्रिया। अभी दोस्त कहां बने हैं हम। ओह! तो कब बनेंगे दोस्त? कौन जानता है कल आपकी कोई बात बुरी लग जाए और मैं आपको फ्रैंड लिस्ट से हटा दूं। न..न… उसके लिए आप बेफिक्र रहिए क्योंकि जो रोहन का दोस्त बन जाता है उसे सब कुछ लग सकता है, पर बुरा नहीं।  हा… हा… हा… अच्छा मैं चलती हूं मां बुला रही है। रुकिए जाने से पहले अपना नाम तो बता दीजिए।  आप तो जानते हो ना मेरा नाम। हां, पर आप बताएंगी तो अच्छा लगेगा। मेरा नाम निशा है और मैं इंदौर से हूं। ठीक है बाय। फिर कब मिलोगी? पता नहीं।

न जाने कितने दिन बीत गए पर निशा कभी ऑनलाइन नहीं मिली। बहुत दिनों तक रोहन उसी समय पर ऑनलाइन होता जब निशा से बात हुई थी,  इस उम्मीद से कि शायद कभी तो बात हो लेकिन वो कभी ऑनलाइन नहीं मिली। कुछ दिनों बाद रोहन ने भी निशा का इंतजार करना बंद कर दिया और अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गया। जीवन की इस आपाधापी में किसी अजनबी के लिए इतना इंतजार क्यों किया जाए? पर रोहन के दिल में निशा तब से जगह बना चुकी थी जबसे उसने पहली बार उसका प्रोफाइल देखा। एक दिन नेट पर अचानक निशा ऑनलाइन मिल गई। रोहने ने तुरंत  मैसेज किया। हाय! बड़े दिनों के बाद। हां, घर का कंप्यूटर बिगड़ा था। ओह, मैं तो सोचा तुम मुझे भूल गई। न..न… मैं अपने दोस्तों को नहीं भूलती। दोस्त… मतलब आपने मुझे अपना दोस्त मान लिया। हां, वैसे किसी इंसान को एक बार में पहचानना नामुमकिन हैं और मैं अजनबियों को मैं दो्स्त नहीं बनाती पर पता नहीं क्यों उस छोटी सी बातचीत में आप मुझे एक अच्छे इंसान लगे। तो बताइए अपने बारे में और कुछ। इस तरह रोहन और निशा की बातें होती रहीं। अब तो रोज शाम को निशा से चैटिंग करना रोहन का नियम बन गया। निशा भी ट्यूशन से आकर शाम को रोहन की राह देखती रहती। ऐसे ही एक दिन चैटिंग करते-करते निशा ने रोहन से पूछा तुम अपनी फोटो तो मुझे दिखाओ। नहीं…नहीं क्या करोगी देखकर। अच्छा तुम तो बड़े स्वार्थी हो, मेरी फोटो देख लिए और अपनी फोटो छिपा रहे हो। निशा तुम कहां रूप की रानी तुम्हें देखने के लिए तो कोई  कुछ भी कर जाए और कहां मैं एक साधारण सी शक्ल-सूरत वाला लड़का। मि.रोहन मुझे आपकी फोटो किसी के स्वयंवर में नहीं भेजना है, चुपचाप फोटो दिखाते हो या…..। ओके.. ओके… ये रही मेरी फोटो। .अच्छे खासे तो दिखते हो, टॉल हो, डार्क हो और हैंडसम भी। नहीं मैं हैंडसम नहीं। निशान बोली- लड़कों का रंग तो डार्क होना ही चाहिए, वरना लड़कियों की खूबसरती कहां दिखेगी और मिं.रोहन मैंने कह दिया न यू आर हैंडसम, मतलब तुम हैंडसम हो, समझे। किसी इंसान की सूरत से ज्यादा सीरत मायने रखती है और तुम्हारी सीरत इतनी अच्छी है कि किसी को भी तुमसे प्यार हो जाए।

४ महीनों से चल रहा ये हंसी-मजाक, येअपनापन अंदर कहीं मन की गहराइयों में किसी गहरे रिश्ते की नींव रख रहा था। वही रिश्ता जिसे शायद प्यार कहते हैं। रोहन इसे महसूस कर रहा था और निशा भी।  रोहन तुम मेरी जिंदगी में एक खास जगह रखते हो, मैं अपनी हर खुशियां, अपने हर गम किसी से बांटती हूं तो वो तुम हो। तुम मेरे हर दर्द की दवा हो। तुम मेरे लिए दोस्त से बढ़कर हो। “दोस्त से बढ़कर” रोहन ने सोचा। हां उसने यही तो कहा था। मैं उसके लिए “दोस्त से बढ़कर” हूं, मतलब क्या वो मुझे प्यार करती है। शाम को रोहन अपने लंगोटिया यार अमित के पास गया। हाय अमित, क्या हालचाल है। मेरे हाल तो ठीक हैं, पर तेरी चाल में उछाल क्यों है। बदले-बदले से जनाब नज़र आते हैं। आजकल तो मिलता भी नहीं तू। कहां है? तुझसे एक जरूरी बात करना है निशा के बारे में। निशा कौन? अच्छा वो चैटिंग वाली। बोल क्या बोल रहा है। (रोहन सकुचाते हुए) यार, मुझे लगता है निशा मुझे प्यार करती है। (अमित हंसते हुए) क्या कहा प्यार और तुझसे? किस ज़माने में जी रहा है मेरे भाई। आज के ज़माने में प्यार-व्यार कुछ नहीं होता बस जरूरत होती है। उसे देख है, कहां वो हूर की परी और कहां तू, उसे तुझसे कैसे प्यार हो जाएगा। अरे इतने बड़े शहर में रहती है। मार्डन लड़की है। उसका उसके बायफ्रैंड से ब्रेकअप-व्रेकअप हो गया होगा। ऐसे समय सहारे के लिए किसी कंधे की जरूरत होती है और वे कंधा है हमारे श्रीमान सेंटी सेंटी से रोहनजी का। उसे बस तेरी जरूरत है कोई प्यार नहीं। देखना किसी और अच्छे लड़के के जिंदगी में आते ही वो तुझे दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंकेगी। फिर रोता हुआ मेरे पास ही आएगा।  मायूस सा रोहन बोला- तो क्या मार्डन और बड़े शहर की लड़कियों को प्यार नहीं होता। (अमित समझाते हुए) फिर वही तेरी गुजरे जमाने वाली बातें। प्यार-व्यार के चक्कर से बाहर आ वरना आशिक तो बन ही गया है कुछ दिनों में आवारा भी बन जाएगा। अब देख पांच महीने पहले तेरा दीप्ति से ब्रेकअप हुआ और देख अगले ही महीने से ही वो समीर के प्यार का दीया जलाते हुए घूमने लगी। मस्त है अपनी जिंदगी में और एक तुझे देख लो। अब भी बोल रहा हूं बात मान, किस्मत अच्छी है जो इतनी अच्छी लड़की फंसी है। इन्दौर जा उसकी भी जरूरत पूरी कर और अपनी भी, दोनों खुश रहोगे। जरूरत का मतलब तो समझ रहा है ना (अमित धीरे से रोहन की कान में फुसफुसाया)। रोहन को अमित की ये बात अच्छी नहीं लगी। मुझे तुझसे कोई बात नहीं करना। मैं व्यर्थ ही यहां दोस्ती के नाते तेरी सलाह लेने चला आया। मैं जा रहा हूं।

रोहन चला तो आया लेकिन उसके मन में उथलपुथल मचना शुरू हो गया। कहीं अमित सही तो नहीं कह रहा। नहीं, नहीं मैं ये क्या सोच रहा हूं। इसी उधेड़बुन में रोहन ऑनलाइन आया। निशा उसका बेसब्री से इंतजार कर रही थी। निशा ने झट से उसे मैसेज किया। रोहन ने अनमना सा जवाब दिया। निशा खुश करने की कोशिश में बोली, क्या बात है आज मूड खराब है क्या। नहीं तो, रोहन बोला। ( रोहन हिचकिचाते हुए ) मैं एक बात पूछूं, तुम गलत तो नहीं समझोगी। नहीं समझूंगी तुम पूछो तो। त…त..तुम्हारा कोई बायफ्रैंड था क्या? आज अचानक बायफ्रैंड के बारे में क्यूं पूछ रहे हो। ऐसे ही पूछा। हां, था पांच महीने पहले ही ब्रेकअप हुआ। बहुत बार इंसान कुछ पल के आकर्षण को ही प्यार समझने लगता है। ऐसा ही मेरे साथ हुआ। पर मैं खुशकिस्मत थी कि इस आकर्षण के मोहपाश से जल्द ही निकल गई। वो मेरे लायक नहीं था। बहुत से लोग अच्छाई का चोगा ओढ़े रहते हैं पर अंदर से वे घृणित व्यक्ति रहते हैं। वो भी इन्हीं की बिरादरी का था। मैं उसके असली चेहरे से जल्द ही वाकिफ हो गई और उससे अलग हो गई।

निशा के इतना कहते ही रोहन के मन में फिर अमित की बातें गूजने लगी। हां, अमित सही कह रहा था। निशा को सिर्फ मेरी जरूरत है, प्यार नहीं। कितना पागल हूं मैं। तभी निशा ने मैसेज किया- प्यार क्या होता है ये शायद मैं महसूस करने लगी हूं। बहुत दिनों से मुझे तुमसे कुछ कहना था। पर तभी रोहन अचानक ऑफलाइन हो गया। रोहन विचारों के भंवर में उलझते जा रहा था। मैंने ये क्या कर दिया। क्या सोच रही होगी निशा? शायद वो मुझसे प्यार का इकरार करने वाली थी और मैंने………। तभी एक दूसरे विचार ने इस विचार को एक किनारे फेंक दिया। सही किया तूने। उसे तुझसे कोई प्यार नही है…. और तुझे भी अब ये पागलपन बंद करना होगा। जिंदगी में ठहराव आने पर सड़ांध होने लगती है। तुझे भी आगे बढ़ना होगा। इन दकियानूसी ख्यालों से आजाद होना होगा। नहीं…नहीं…. ये मैं क्या सोच रहा हूं (रोहन ने खुद को संभाला)। सही तो कहा निशा ने इंसान आकर्षण को प्यार समझ लेता है। जैसा निशा के साथ हुआ मेरे साथ भी तो हुआ। मैं दीप्ति के आकर्षण को प्यार समझ रहा था। और अब जब मुझे मेरा प्यार मिल रहा है तो मैं उसे आकर्षण समझने की भूल कर रहा हूं। नहीं मैं ये गलती नहीं कर सकता।  प्यार में जो समझ, समर्पण, विश्वास चाहिए होता है वही तो हम दोनों के बीच और मैं एक ऐसे इंसान से प्यार की परिभाषा सीखने गया था जिसे प्यार से कोई मतलब नहीं। कितना बेवकूफ था मैं। कुछ पल के लिए अमित के विचारों ने मेरे आंखों को भ्रम के कोहरे से ढंक दिया था। आज इसी भ्रम के कारण मेरा प्यार मुझसे ओझल हो जाता। मैं अचानक आफलाइन हो गया। पता नहीं क्या सोच रही होगी निशा।

रोहन तुरंत ऑनलाइन हुआ मगर निशा जा चुकी थी। रोहन खुद को कोसता रह गया। बुरे ख्याल मन में फिर उमड़ने लगे। ये मैंने क्या किया। निशा कहीं मुझे छोड़ न दे। नहीं, वो मुझसे प्यार करती है वो ऐसा नहीं कर सकती। यही सब सोचते हुए वह रातभर जागता रहा। सुबह ९ बजे फिर आनलाइन हुआ, फिर ११ बजे, २ बजे पर निशा का अता-पता नहीं था। रोहन शाम तक कंप्यूटर के सामने बैठा रहा। इंतजार में उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। शाम ६ बजे निशा का मैसेज आया। मैसेज आते ही रोहन के आंखों की चमक लौट आयी। क्यों कल क्या हो गया था तुम्हें, क्या मैंने तुम्हें अपसेट किया? नहीं तो (रोहन बोला)। फिर अचानक ऑफलाइन क्यों हो गए। बस एक द्वंद्व चल रहा था मन में दिल और दिमाग के बीच। अच्छा हर बात मुझे बताते हो तो ये बात मुझे क्यों नहीं बताए।  नहीं बता सकता था, ये द्वंद्व मुझे खुद लड़ना था। अच्छा तो इस द्वंद्व में जीता कौन? मेरा दिल जीता। अगर हार जाता तो जिंदगी की सबसे अनमोल चीज़ खो देता। कौन सी चीज? (निशा ने विस्मित होकर पूछा)  तुम निशा, तुम (रोहन ने जवाब दिया)। म..म…मतलब (निशा शर्माते हुए बोली)। मतलब कि मैं तुमसे प्यार करता हूं, शायद पहली बातचीत से ही। मेरी जिंदगी में कोई इतने करीब नहीं रहा जितनी तुम हो, किसी ने मुझे इतना नहीं समझा। एक तुम ही जिसने मेरी जिंदगी खूबसूरत बनाई है। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और हमेशा करूंगा। निशा चुप थी……. उसकी आंखों में खुशी के आंसूं थे….। आंसूकी हर एक बूंद मानो एक -एक गम हो.. दुख हो…. जो अब उसकी जिंदगी से जा रही थी। जो वो कल रोहन से कहना चाह रही थी आज रोहन ने कह दिया। निशा बोली, मैं भी तुम्हें बहुत बहुत बहुत प्यार करती हूं….। तुम जब से मेरी दुनिया में आए हो मेरी जिदंगी बदल दी है तुमने। मेरे चेहरे की हंसी तुमसे ही आती है। तुम्हारा साथ पाकर मैं सब दर्द भूल जाती हूं। यही आपसी समझ, समर्पण, विश्वास, इस तरह एक-दूसरे की परवाह करना ये भावनाएं ही तो जिंदगी को खूबसूरत बनाती है। इसी खूबसूरत अहसास को ही तो प्यार कहते हैं। मैं तुम्हें बेपनाह प्यार करती हूं रोहन।   क्या मैं अपनी जिंदगी की सबसे खूबसूरत आवाज़ सुन सकता हूं?  निशा ने उसे  अपना नंबर दिया। रोहन ने नंबर घुमाया। निशा की आवाज़ सुनते ही रोहन का रोम-रोम खिल उठा। निशा बोली- तुम पास न होकर भी हमेशा मेरा साथ रहते हो, काश मैं तुमसे अभी मिल पाती। हम जरूर मिलेगें निशा। जल्द, बहुत जल्द।

अगले दिन यानी १२ फरवरी को रोहन निशा से मिलने इंदौर के लिए निकल पड़ा। रास्ते में उसे अमित दिखा पर वह उसे नजरअंदाज करते हुए चलने लगा। तभी अमित ने आवाज लगाई “कहां चले आशिक मियां? कहीं इंदौर तो नहीं। बढ़िया है जाओ जाके ऐश करके आओ। ” ये बात रोहन को नागवार गुजरी। रोहन अमित की तरफ मुड़ा और बोला- हम दोनों बचपन से दोस्त हैं। एक दूसरे के हमदर्द हैं लेकिन अगर तू किसी के प्यार की कद्र नहीं कर सकता तो उसका अपमान भी मत कर। जिस समय मुझे जीवन के सबसे अहम पड़ाव पर सच्चे दोस्त के राय की जरूरत थी उस समय तू ही मुझे अपने प्यार से दूर ले जा रहा था। मैं नहीं जानता तूने कभी किसी से सच्चा प्यार किया है कि नहीं पर मैं भगवान से दुआ करूंगा कि तूझे भी एक दिन सच्चा प्यार मिले ताकि तूझे उस प्यार का अहसास हो। तू मेरा सच्चा दोस्त है और तूने हमेशा मुझे समझा है और मैं चाहता हूं कि तू हमारे प्यार को भी समझे। अगर समझ सकता है तो मेरे साथ चल। इतना कहकर रोहन जाने लगा। अमित को अपनी कही बात पर ग्लानि महसूस हुआ। आंखों से पछतावे के बूंद छलके जिन्हें उसने झट पोछा और दौड़ता हुआ रोहन के पास गया। हंसते हुए बोला- रुक, कपड़े तो बदलने दे… फिर चलेंगे और हां, वहां नीरज के घर में रुकेंगे मेरे पास होटल में रुकने के पैसे नहीं हैं।

अगले दिन दोपहर को रोहन और अमित इंदौर पहुंचे। पहुंचते ही रोहन ने निशा को फोन किया “कहां हो।” कहां रहूंगी, अपने घर मं ही हूं। कमाल करती हो यहां हम तुमसे मिलने इतने दूर इंदौर चले आए और तुम घर में आराम फरमा रही हो।  सच में, तुम मज़ाक तो नहीं कर रहे। तुम्हारे लिए इतना गंभीर होकर इंदौर आ गया और तुम्हें मज़ाक लग रहा है। चल यार अमित वापस चलते हैं। ठीक है मैं मान गई। बताती हूं कहां मिलना है। इसके बाद रोहन और अमित निशा से मिलने एक पार्क में पहुंचे। निशा और अमित को तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि वो दोनों सचमुच एक दूसरे के सामने खड़े हैं। कल जो सैंकड़ों किलोमीटर दूर थे आज उनके बीच की दूरी सिर्फ चंद फुट थी। ऐसा लगते है जैसे कुछ दिनों पहले ही की बात है जब रोहन ने निशा को पहली बार मैसेज किया था और आज यहां प्यार के रंग में डूबे दो प्रेमी सामने खड़े थे। दोनों मानो एक दूसरे की बाहों में समाने बेताब थे। अमित को दोनों की आंखों में एक-दूसरे के लिए बेपनाह प्यार साफ दिख रहा था साथ ही उसे अपने कही बातों पर आत्मग्लानि भी हो रही थी। वह निशा के पास आया और बोला “हाय, मैं हूं अमित। रोहन का परम मित्र। आप दोनों का प्यार देखकर मुझे सचमुच बहुत खुशी हो रही है। और हां सॉरी और थैंक्स।  सॉरी और थैंक्स क्यों  (निशा ने पूछा)?  वो आप नहीं समझोगी। ठीक है अब तुम दोनों घूमो मैं नीरज के घर हो आता हूं। अमित जाने लगा और मन ही मन रोहन और निशान को धन्वायद देने लगा। “थैंक्स रोहन-निशा, थैंकयू वेरी मच। तुम लोगों ने मेरे मन के मैल को साफ कर दिया। स्त्री के शारीरिक सौंदर्य से ऊपर उठकर अब मैं प्यार के सौंदर्य को महसूस कर सकता हूं। प्यार भरी ये जिंदगी कितनी हसीन है। सच में प्यार का अहसास अद्भुत है, बहुत अद्भुत।”

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nikhil के द्वारा
February 15, 2011

सुमित जी, शायद आपकी कहानी पहली बार पढ़ रहा हूँ. अच्छा प्रयास.

kmmishra के द्वारा
February 14, 2011

सुमित प्यारे अच्छी कहानी बुनी है आपने । इंटरनेट मिलाये जोड़ी । शायद ऐसे मिलाता भी होगा । कहानी खूबसूरत भी है और साथ में कुछ सीख भी देती है । आभार ।

आर.एन. शाही के द्वारा
February 14, 2011

सुमित जी, क्या सचमुच आजकल आनलाइन सच्चा प्यार होने लगा है, या आनलाइन प्यार आपकी कहानी की तरह ही कल्पित होता है । सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर दोस्ती और आपसी विचारविमर्श तो बड़े-बड़े लोग कर रहे हैं, लेकिन प्यार की वास्तविक समझ बिना मिलकर बातें किये भी बन सकती है, इसपर विश्वास कर लेना आसान नहीं है, वह भी मात्र चंद चैटिंग्स में ही । मेरा मानना है कि चैटिंग से सिर्फ़ दिल बहलाया जा सकता है । कई बार तो छद्म वेश में धूर्त्त लड़के ही लड़कियां बन कर एकदूसरे को मूर्ख बनाते पाए जा रहे हैं । कहानी अच्छी लगी । बधाई ।

R K KHURANA के द्वारा
February 14, 2011

प्रिय सुमित जी, बहुत सुंदर कहानी है आपकी ! बधाई आर के खुराना


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