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सांप हो तुम दूध तो पीना ही पड़ेगा (व्यंग्य)

Posted On: 3 Aug, 2011 में

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आज नाग पंचमी है और सांप को दूध पिलाने का रिवाज है। वैज्ञानिक कहते हैं सांप दूध नहीं पीते, वे दूध पी नहीं सकते पर हमारे घर वालों ने कहा जा सांप को दूध पिला के आ। वैसे भी बहुत सारे पाप किए हैं जीवन में तूने, आज उतारने का दिन है। सांप जितना दूध पीएगा उतना तेरा पाप उतरेगा। मैंने कहा- सांप दूध नहीं पीता, वो चूहा खाता है, कीड़-मकौड़े खाता है। वह तो मांसाहारी है। पर मां की आंख में गुस्सा देख मैं दूध का कटोरा लिए वहां से भागा। पर अब यक्ष प्रश्न यह था कि सांप को कहां ढूंढा जाए।फिर भी मैं गलियां छानते रहा। देखा एक बिल में सांप घुसने की कोशिश कर रहा है। मैंने उसका पूंछ पकड़ा औरउसे बाहर निकाला। सांप फन फैलाकर खड़ा हो गया और बोला- क्या हुआ तुझे। तुम इंसानों के डर से ही तो छुप रहा था। मेरे सारे साथी समय पर छुप गए। उन्होंने मुझे चेताया भी कि छिप जा नहीं तो मनुष्य आ जाएंगे। आज नाग पंचमी है, तुझे जबर्दस्ती दूध पिलवाएंगे। पर मैंने लापरवाही कर दी और तुमने मुझे पकड़ लिया। अब बोलो क्या चाहिए। मैंने कहा- चाहिए कुछ नहीं बस, ये दूध पी लो। सांप मूंह फेरते हुए बोला- नहीं पीता। मैं बोला- सांप हो तुम, दूध तो पीना ही पड़ेगा। सांप बोला- चल इमोशनल अत्याचार मत कर। पी लूंगा, पर पहले मेरी व्यथा सुनी पड़ेगी तुमको। मैंने बोला- बस इतनी सी बात है, लोगों की परेशानियां सुनना और उन्हें सुलझाना तो मेरा प्रिय शगल है। शुरू हो जाओ- नागराज, व्यथपुराण आरंभ किया जाए।

सांप रोते हुए बोला- तुम मनुष्यों ने हम भोले-भाले सांपों का बहुत शोषण किया है। हमारी इजाजत के बिना हमें मुहावरों में जबरन ठूंस-ठूंसकर खलनायक का दर्जा दे दिया तो कभी फिल्मों में  हमें फिट करके पैसे बना लिए और हमें इतने सालों बाद तक रायल्टी तक नहीं मिली है। हमारी सर्प उत्थान समिति इसके खिलाफ सर्पमोर्चा निकालने की सोच रही है। खैर यहां तक तो हमने किसी तरह बर्दाश्त कर भी लिया मगर हद तो तब हो गई जब तुम इंसानों ने हमारे निजी जीवन तक को भी नहीं छोड़ा। जंगलों में कैमरे लगा दिए। नाग-नागिन रोमांस करने जाएं तो उसकी शूटिंग, बिल से बाहर निकले तो शूटिंग, बिल में छुपे रहे तो भी शूटिंग। इतनी शूटिंग हो गई कि दहशत में कई नागिनों ने तो अंडे देना ही बंद कर दिए। पहले मैं बस्तर के घने जंगल में रहता था। एक बार मैं बड़ी मशक्कत के बाद मानी एक नागिन के साथ प्रणय करने जा रहा था कि तभी रास्ते में मुझेएक जीव वैज्ञानिक ने उठा लिया और उंगली दिखा-दिखाकर मेरी विशेषताएं बताने लगा। मैं बेबस सा फुफकारते हुए बोला- ” मेरी जितनी विशेषताएं बताना है बता ले, लेकिन अगर आज मैं अपनी प्रेमिका से नहीं मिल पाया तो सोच लेना तुझे तेरी सुहागरात नहीं मनाने दूंगा।”  इंसानों की आबादी तो बढ़ती रही लेकिन सांपों की आबादी पर अल्पविराम लग गया।


फिर भी सांप सब कुछ रेंगते-रेंगते सहते रहे। सांप के आहार में चूहे, गिलहरी जैसे छोटे जानवर आते हैं लेकिन इंसानी करतूत के कारण इनका आहार भी छिन गया। गिलहरी और मेंढक तो ढूंढे नहीं मिलते हैं फिर भी जिस दिन मिल गए समझो उस दिन सांपों की दिवाली होती थी। इसलिए सांपों ने मजबूरन चूहे को ही अपने मेनू में टॉप पर रख लिया। पर यहां भी उनका निवाला छिन गया। चूहों की तलाश में हमने शहरों और गांवों का रुख किया क्योंकि जहां भरपूर अनाज वहां भरपूर मोटे-मोटे चूहे। परंतु यूरिया और खाद मिले अनाज खाने वाले चूहे को खाने से कई सांपों के पेट में मरोड़ होने लगा और कई तो मौके पर ही लुढ़क गए। सांपों की ऐसी दुर्गति देखकर सांपों ने प्रकृति के विपरीत जाकर शाकाहारी होने का फैसला किया, जिनमे मैं भी था। एक सुबह मैं अपनी प्रेमिका नागिन के लिए भोजन की तलाश में निकला। पिछले वर्ष की बात है नागपंचमी के दिन हम दोनों ने दूध में “मिल्क बाथ” लिया उसके बाद सोचा कुछ खाया जाए।  पास ही में हनुमानजी का मंदिर था। मैंने हनुमान जी की मूर्ति के पास भोग में चढ़ने वाला सामान मिठाई, फल, आदि देखा। मैंने सोचा क्यों न यहीं फन मारा जाए, मंदिर भी पास ही में है पांच मिनट में काम निपट जाएगा। मैं सब बटोर ही रहा था कि मुझे किसी ने देख लिया। मुझे देखने वाला सनसनी की खोज में निकला टीआरपी की मार से पीड़ित न्यूज चैनल का सनसनाता रिपोर्टर था। मुझे हनुमानजी को चढ़ा भोग खाता देख उसने मुझे हनुमानभक्त सांप की पदवी दे दी और फौरन अपने जैसे अन्य सनसनीपिपासु पत्रकारों को वहां मिनटों में खड़ा कर दिया। लोग इकट्ठे होते चले गए, दो आए, चार आए, आठ आए, पलक झपकते ही पूरा मंदिर हाऊसफुल हो गया। कुछ देर बाद तो मुझ हनुमानभक्त सांप को देखने टिकट लगने लगा था। कुछ चलताऊ किस्म के टपोरियों ने तो वहां साइड में साइकिल और गाड़ी स्टैंड भी लगा दिया। सायकिल का १० मोटसायकिल का २० और कार का ५० रुपए मात्र। हां प्रेसवालों और वीआईपी लोगों के लिए मुफ्त।


snake2मैंने अब तक कईयों का बेड़ा पार लगा दिया था। सुबह से दोपहर हो गई मैं उसी अवस्था में अपनी कुंडली में मिठाई, फल और भोग का प्रसाद लपेटे हुआ था। मैं तो आया था ५ मिनट के लिए लेकिन तुम खुरापाती इंसानों ने ५ घंटे की परेड करवा दि। इतने में ही किसी पंडित ने घोषणा की कि यह सांप परम हनुमान भक्त है। पिछले जनम में ये परम हनुमान भक्त था और इस जन्म में सर्प रूप में फिर हनुमानजी के चरणों में अपनी भक्ति दिखाने आया है। मैं सोचने लगा- “खाली पेट न होय भक्ति, मैं तो खाना जुगाड़ने आया था या ये लोग मुझसे भक्ति करवाने पर तुले हैं। इस पंडित को अपने इस जन्म का ठीक से पता नहीं और मेरे पिछले जनम की कहानी सुना रहा है।” सभी रिपोर्टर पंडित की इस बात को लाइव दिखाने लगे। पंडित भी खुद को कैमरे के सामने पाकर अपने लुक पर ध्यान देने लगा और बीच-बीच में अपने बाल और धोती भी ठीक करता। इधर मैं बाहर निकलने के लिए जरा सी हलचल क्या करता कि सारे कैमरे और माइक मेरी ओर घूम जाते। सांप की तरह दिख रहे वे तार से बंधे माइक मुझे और भयभीत कर रहे थे। मगरमच्छ के मुंह की खुले हुए कैमरे मुझे कथित हनुमानभक्त सांप को खा जाने आतुर प्रतित हो रहे थे।


इसी बीच थका हुआ मैं जरा देर के लिए सो गया। तभी किसी ने हल्ला कर दिया कि हनुमानभक्त सांप को हनुमानजी के चरणों में अद्भुत शांति का अनुभव मिल रहा है, तभी वो उनके पैरों में सो गया। देखों किस तरह खुद को हनुमानजी के चरणों में खुद को अर्पित कर दिया है। इतना सुनते ही मैं फिर जाग गया। तुम लोग शांति से सोने भी नहीं देते। मैं भागने के प्रयास में दाएं मुड़ने का प्रयास करता तो कोई एक नई कहानी के साथ पेश हो जाता है। बाएं मुड़ता तो फिर कोई कहानीकार नई कहानी बना देता। ऐसे लग रहा था मानो देश के सारे कहानीकार यहीं उपस्थित हो गए हैं और मुझे बेब सांप के साथ अपना बैर निभा रहे हैं। एक चलते-फिरते भजन गायक ने तो तत्काल मेरे ऊपर आरती बना दी और अपना आरती गायन भी शुरू कर दिया। कुल मिलाकर सबकी अपनी अलग-अलग कहानी थी, पर सबका हीरो एक ही था- ” मैं हनुमानभक्त सांप”।


अभी ये सब चल ही रहा था कि मुझे दूध पिलाने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। कुंवारे-कुंवारियां विशेषकर दूध पिलाने आए क्योंकि पंडितजी ने घोषणा कर दी थी कि इस हनुमानभक्त सांप को दूध पिलाने वाले कुवारे-कुवारियों की शादी महीनेभर के भीतर हो जाएगी। मैं सोचने लगा- “अबे निकम्मों, तुम लोगों के चक्कर में मेरी खुद की शादी नहीं हुई। बमुश्किल एक नागिन मिली है उसी के साथ लिव इन रिलेशनशिप में हूं और तुम लोग मुझे दूध पिलाकर अपनी शादी करवाने के जुगाड़ में हो। अरे निर्दयियों कुछ तो रहम करो। अगर मैंने इतना सारा दूध पी लिया तो मेरा रंग तो ऐसे ही काले से गोरा हो जाना है काले से गोरे होने कारण जात बाहर हो जाऊंगा वो अलग।” फिर भी लोग मुझे दूध पिलाने लड़ते-मरते रहे।


मैं अब भागने का प्रयास में हनुमानजी की मूर्ति के चक्कर लगाने लगा। तो लोग इसका अर्थ निकालने लगे कि सांप भक्तिधुन में नाच रहा है और उसे मोक्ष मिलने वाला है। मैं भी सोचने लगा- “तुम लोगों को जो सोचना है सोचो, एक बार यहां से निकल जाऊं कसम खाता हूं दोबारा नहीं आऊंगा। मेरे लिए तो फिलहाल यहां से निकलना ही मोक्ष समान है।”


शाम से रात हो गई। मैं भी बाहर न जाने के कारण उकता गया था। सबकी नींद उड़ाने वाले रिपोर्टर धीरे-धीरे नींद की गिरफ्त में आ गए। मैंने मौका देखा और अपनी केंचुली निकालकर धीरे वहां से खिसक लिया।  नींद खुलने के बाद रिपोर्टरों ने जब सांप को गायब देखा और सिर्फ उसकी केंचुली देखी तो फिर टीवी पर ब्रैकिंग न्यूज फ्लैश करने लगे- हनुमानभक्त सांप हनुमानजी में समा गया। ऐसी अद्भुत भक्ति  कभी किसी ने देखी न होगी। सांप अपनी केंचुली यहां छोड़कर हनुमानजी की मूर्ति में समा गया। जय हो हनुमानभक्त सांप की। सब रिपोर्टर फिर से हनुमानजी की मूर्ति और केंचुली की फोटो उतारने में मशगूल हो गए। लोगों द्वारा हनुमानभक्त सांप की आरती गायन और कहानी लेखन का कार्यक्रम फिर से शुरू हो गया। मैं ये सब देख अपनी नागिन के साथ भागा जो मेरा इतने देर इंतजार करने के बाद बिल्लू सांप के साथ जाने का मन बना चुकी थी। शुक्र है आखिर मैं से भाग पाय और अपनी नागिन को भी पा लिया। तब से मैंने हर साल कसम खाई है नागपंचमी के दिन तो मुझे दिखना ही नहीं है। सांप की ऐसा हृदयविदारक कहानी सुन मेरी आंख भर आई। मैंने कटोरी का दूध खुद पी लिया और बोला, जाओ मेरे भाई, पाय लागूं, भाभी को चरणस्पर्श कहना। भतीजे-भतीजीयों को मेरा प्यार देना। मुझे अश्रुजल बहाता देख वह सरपट भागा। पर पीछे खड़े पोंगापंडितजी सब सुन चुके थे। उन्होंने तुरंत एसएमएस द्वारा द रिटर्न ऑफ हनुभक्त सांप की खबर फैलानी शुरू कर दी। मैं बस आंसू बहाते रहा। जब आंख खोला तो देखा कि पंडितजी मुझे भक्त ऑफ हनुमानभक्त सांप की उपाधि दे चुके थे। और मेरा आस-पास कैमरे की चकाचौंध थी। भागने की जगह भी न थी। मैं चिल्लाया- हे नागराज, मुझे बचाओ…………।


panditjiपोंगापंडितजी का बम्पर ऑफर- अगर आप लोग हनुमानभक्त सांप की आरती को अपना रिगटोन बनाना चाहते हैं तो अपने मोबाइल से saap लिखकर 55555 पर भेज दीजिए। हनुमानभक्त सांप की केंचुली के फोटो और उससे बने ताबीज के लिए आप संपर्क कर सकते हैं बाबा नागराज से। घरपहुंच सेवा उपलब्ध है। घरपहुंच सेवा का अतिरिक्त चार्ज लगेगा क्योंकि हमारे हॉकर कोई नागराज नहीं हैं जो उड़कर आप लोगों के घर टपक जाएंगे, गाड़ी से आना पड़ेगा और पेट्रोल भी महंगा हो गया है।snake1

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amar Singh के द्वारा
August 4, 2011

ये इस दुनिया की बड़ी पुरानी रीत है, की जिस व्यक्ति को जिस चीज की आवशयकता नहीं होती तब उससे तो ओपचारिकतावश यह अवश्य ही पुछा जाता है की फलां वस्तू लोगे, ले लो भाई, अब तो लेनी ही होगी इत्यादि. welcome for visit http://singh.jagranjunction.com/

bharodiya के द्वारा
August 4, 2011

गिरजाघरों के सापों को अंडा नही मिला निगलने को , जो हनुमान के पास पहुच गया दुध पिने को ? हनुमान बहुत दयालु है वो कैसे भी जहरिले सांप को खाना खिला ही देते है ।

अन्‍नाभाई के द्वारा
August 4, 2011

http://sumityadav.jagranjunction.com/files/2010/09/snake1.gif इसे दूध नहीं पिलाओगे तो ऐसे ही तड़पता रहेगा। ले आओ और दो चार लीटर मेरे लिए भी।


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