मन के दरवाजे खोल जो बोलना है बोल

मेरे पास आओ मेरे दोस्तों, एक किस्सा सुनाऊं...

55 Posts

3328 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2077 postid : 357

मैं तो रामदेव दीवानी (व्यंग्य)

Posted On: 4 Aug, 2011 मस्ती मालगाड़ी में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ramdev-rakhi-sawantदुनिया में दो लोग कुछ भी कर सकते हैं- पहले तो जाहिर सी बात है रजनीकांत ही होंगे। लेकिन जो दूसरा नाम है वो है असली धमाका। जी हां, धमाके पे धमाके करने वाली ड्रामा क्वीन राखी सावंत। राखी जब भी कुछ करती हैं लोगों को चौंका कर रख देती हैं, अब क्या करें उनका रेपुटेशन ही ऐसा बन गया है। लेकिन इस बार तो राखी ने सबको हिला दिया जब उन्होंने रामदेव से शादी करने की इच्छा जाहिर की। कहां हमारे बाबा बेचारे ब्रहामचारी और उनके पीछे पड़ गई स्वयंवरवाली। परंतु राखी द्वारा इस प्रेम निवेदन के बहुत दिनों बाद भी जब रामदेव की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो हम समझ गए कि ये एकतरफा प्रेम का मामला है। वैसे इसे प्रेम कहना उचित नहीं होगा, ये आकर्षण हो सकता है। वैसे ये प्रेम है या आकर्षण इस पर विस्तृत चर्चा हम अगले साल वेलेंटाइन डे पर जागरण जंक्शन में होने वाले प्रेममय कांटेस्ट के दौरान कर लेगें। पर अभी के लिए तो हम दुखी थे। वो क्या है ना एकतरफा प्यार से हमें बड़ा दुख होता है। हम अपने जमाने के पहंचे हुए एकतरफा प्रेमी रहे हैं। बहुत सारे एकतरफा प्यार के भुक्तभोगी। अब जैसा कि आप जानते हैं हमें दूसरे के फटे मे टांग अड़ाने की बहुत बुरी आदत है। अगर फटा न भी हो तो हम फाड़कर उसमें अपना टांग अड़ाते हैं। बस हमने राखी को एकतरफा प्यार के दर्द से बचाने की ठान ली। बाबा रामदेव और राखी की बात को आगे बढ़ाने का निर्णय किया। वैसे  न तो राखी ने बाबा रामदेव से प्रतिक्रिया मांगी थी और न बाबा प्रतिक्रिया देने के किसी मूड में थे, पर हम तो हम हैं, मैच मेकिंग के लिए बिलकुल आमादा।


हमने झट से जुगाड़शास्त्र द्वारा किसी तरह बाबा रामदेव और राखी सावंत की कुंडलियां जुगाड़ी और चल पड़े अपने प्रिय मित्र पोंगा पंडितजी के पास। मैंने सोचा पहले कुंडिलयां मिला ली जाएं दोनों की वरना मालूम पड़ रहा कि मैंने दोनों की बात बना दी और आखिर में कुंडली ही नहीं मिलीं। पोंगापंडितजी के घर पहुंचने ही मैंने उनको दोनों की कुंडलियां थमा दी और हांफते हुए बोला- बड़ी जल्दी में हूं। बस जल्दी से दोनों की कुंडिलयां देखिए और बताइए कितने गुण मिलते हैं। पंडितजी उस समय किसी दूसरे जोड़े की कुडंलियां जांच रहे थे। वे बोले- क्या हुआ, इतनी जल्दी में क्यूं हों, किसकी कुंडिलयां है ये। मैं उनके सामने पड़ी पुरानी कुंडलिया हटाते हुए बोला- इन्हें हटाइए और लीजिए जल्दी जांचिए बाबा रामेदव और राखी सावंत की कुडंलियां, एकदम फटाफट।


बड़े बेमन से उन्होंने कुंडिलयां जांचनी शुरू की लेकिन जांचने के कुछ क्षणों बाद ही वे सुपरफास्ट ट्रैन की तरह पटरी पर दौड़ने लगे। वाह-वाह पहले तो इनके गुण दूर-दूर तक नहीं मिलते थे लेकिन परिस्थितयों ने ऐसा खेल खेला कि ३० गुण मिल रहे हैं। मीडिया में रहने का गुण जो राखी में ऊंचे स्तर तक था और बाबा जो मीडिया से दूरी बनाकर रखते थे, हाल के दिनों में ऐसा छाए कि मीडिया वाले गुण इनमें समा गए। स्वास्थ्य को लेकर सजग दोनो ही रहते हैं। राखी तो शुरू से ही वाचाल रही हैं लेकिन हाल  के दिनों में बाबा ने भी बोलना सीख लिया और ऐसा बोला कि सबकी बोलती बंद कर दी। तो भैया सुमित, मेरे तरफ से तो ये रिश्ता एक फिट है। अब बाकी तुम्हारा सिरदर्द है।


मैंने धन्यवाद देते हुए कहा- आपने इतना बता दिया बस और क्या चाहिए। बड़ी कृपा आपकी। हम तो पैदाइशी मैचमेकर हैं। जब मेट्रीमोनियल साइट्स का निर्माण भी नहीं हुआ था, हम तो तबसे सक्रिय हैं। हमारा बस चले तो हम तो किसी को कुवारा ही न रहने दें, सबकी शादी करवा दें। खैर, हम निकल पड़े अपने मकसद पे। सबसे पहले राखी से पूछना जरूरी था कि बाबा में उन्होंने ऐसा क्या देखा जो वे उनके प्रति आकर्षित हो गई। घर पहुचने पर पहले तो राखी ने हमको हडकाया पर खुद को मीडियावाला बताने पर अंदर बुलाकर अपने हाथों से जलपान की व्यवस्था की। मैंने पहला समोसा उठाते हुए पहला सवाल दागा- राखीजी, अपने असफल लव अफेयर, असफल स्वयंवर और असफल कैरियर के बाद आप अब ये क्यों मानती हैं कि बाबा में ही आपका भविष्य है। राखी बोली- सबसे पहले तो मेरा अफेयर मेरी गलती थी, नादानी थी।  स्वयंवर तो मैंने खास बाबाजी के लिए ही रचवाया था पर बाबा के वहां न पहुंचने से मैं दुखी हुई, इसलिए शादी का ड्रामा करने के बाद मैंने उसे तोड़ दिया। मैं तो शुरू से ही बाबा की दीवानी हूं।


तो राखीजी आप खुद को बाबाजी की दीवानी बताती हैं पर ये बताइए बाबा में ऐसा क्या देखा जो आप इंप्रेस हुई। राखी- देखिए मैं तो शुरू से ही उनके योग पर लट्टू हूं। जिस गति से वे अपना पेट घुमाते हैं उसी गति से मेरा डांस भी लोगों का दिल धड़काता है। सलमान, शाहरुख, आमिर ने तो सिक्स पैक बनाएं, लेकिन बाबा के तो नेचुरल फ्लैक्सीबल एब्स हैं। जैसा कि मैंने बताया कि स्वयंवर तो मैंने बाबा के लिए ही करवया था लेकिन वे नहीं आए इसलिए इस बार मैंने खुले आम प्रेम निवेदन किया है और बस बाबा की एक हां की देरी है, मैं चैनल वालों से बोलकर हमारा पर्सनल स्वयंवर करा दूंगी।


म..म..मतलब कि आप चाहती हैं बाबा वैसे ही उल-जुलूस कलाबाजियां करें जैसे स्वयंवर के दौरान अन्य प्रतियोगियों ने किए थे, मैंने सवाल दागा। राखी- हां, दरअसल बाबा में ही वो स्टेमिना है कि वे सारे टास्क बखूबी कर सकते हैं। उनकी फिट बॉडी और स्वास्थ्य के प्रति उनकी सजगता की ही तो मैं दीवानी हूं। उनसे शादी करने से मुझे योग ट्रेनर का भी फायदा मिल जाएगा और मैं भी फिट रहूंगी। मुझे पहले बाबा का चुप रहने वाला स्वभाव कुछ खास पसंद नहीं था, लेकिन हाल के दिनों में उनके मुंह से एक के बाद तूफानी बयान निकले हैं कि उन्होंने तो मुझे भी हरा दिया। मैं तो हूं ही बड़बोली, और बाबा द्वारा ऐसे बोलबचन तो मानो सोने पर सुहागा हैं।


मेरे हिसाब से बाबा मेरे लिए परफेक्ट वर हैं। इतना बड़ा बिजनेस हैं, पापुलर हैं, फिट हैं, जवान हैं, सफल हैं, मुझे और क्या चाहिए। आपने कहा कि आप हनीमून चांद पर मनाना चाहेंगी, ऐसा क्यूं?? देखिए, लोग तो मुझे पहले ही कहते थे कि मैं इस दुनिया की नहीं हूं, किसी और ही दुनिया में रहती हूं। और बाबा भी मुझे इस दुनिया के नहीं लगते। इसलिए मैं उनके साथ अपना हनीमून इस दुनिया से बाहर चांद पर मनाना चाहती हूं।


पर क्या आपको लगता है कि बाबा और आपकी जोड़ी जमेगी?? जमेगी क्यों नहीं, राखीजी तुनकते हुए बोली। जोड़ी जमने के लिए दोनों का एक जैसा होना जरूरी नहीं बल्कि एक-दूसरे का पूरक होना जरूरी है। बाबा बोलते कम हैं और मैं बड़बोली हूं, अगले अनशन के समय वे कुर्सी पर बैठे रहेंगे और मैं बोलती रहूंगी, बोलती रहूंगी और बौलती रहूंगी। आप तो जानते ही हैं जब मैं बोलती हूं सबकी बोलती बंद हो जाती है। और जहां तक बात है रात को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की तो मुझे देखकर किसी की लाटी उठाने की भी हिम्मत नहीं होगी, आप जानते हैं मैं कितनी खतरनाक हूं।


पर राखीजी बाबा से पहले आप राहुल गांधी के पीछे पड़ी थी। राखी- देखिए, मैं किसी के पीछे  नहीं पड़ती, लोग मेरे पीछे पडते हैं। वैसे भी राहुल का नाम तो मैंने ऐसे ही बाबा को जलाने के लिए लिया था। आप तो जानते ही हैं ना, ज्येलसी फैक्टर। पर, बाबा तो तब जलेंगे न जब उनके मन में आपके लिए कुछ हो, वे तो बह्मचारी हैं। और मुझे नहीं लगता कि उनकी आपसी शादी करके अपना ब्रह्मचर्य तोड़ने में कोई दिलचस्पी है। मेरा द्वारा इतना कहते ही राखीजी बौखला गई और मेरे हाथ का समोसा छीनते हुए बोली, चलो उठो। तो तुम हो असली फसाद। तुम ही हो बाबा को मेरे खिलाफ भड़काने वाले। तुम नहीं चाहते कि मेरी उनसे शादी हो, तुम चाहते हो वे आजीवन ब्रह्मचारी रहें।  मैं समझ गई, तुम मुझे पसंद करते हो। अगर मुझे इतना ही पसंद करते हो तो मेरे स्वंयवर में आ जाते। अब जब मैं सेटल होने की सोच रही हूं तो मुझे बाबा के खिलाफ और बाबा को मेरे खिलाफ भड़का रहे हो। तुम नहीं चाहते बाबा और मैं मिले। मैं इन धुआंधार आरोपों से चित हो चुका था। कुछ हिम्मत कर मैं बोला- ये आप क्या कह रही हैं। म..म..मैं आपको पसंद नहीं करता, न मैं आप दोनों के बीच आ रहा हैं। राखीजी बोली- चुप करो तुम। मुझे मत समझाओ। मैं सबको बता दूंगी, प्रेस कांफ्रेंस करवाउंगी। कहां है मीडिया, यहां आओ। मेरे और बाबा के बीच दरार डालने वाला मुझे मिल गया….। पकड़ो इसको।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

362 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran