मन के दरवाजे खोल जो बोलना है बोल

मेरे पास आओ मेरे दोस्तों, एक किस्सा सुनाऊं...

55 Posts

3328 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2077 postid : 411

चांद पे जा रे, चांद के प्यारे (व्यंग्य)

Posted On: 10 Jul, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

लोग कहते हैं टेक्नॉलाजी ने इंसान के जीवन को सुगम बना दिया है, लेकिन इसने तो मेरी जिंदगी को दुर्गम बना दिया है। खबरें आ रही हैं कि करोड़ों रुपए देकर अब चांद की यात्रा की जा सकती है। बस इसी खबर ने मेरी नींद उड़ा दी है। पहले तो हम अपनी प्रियतमा को बोल बचन दे दिया करते थे कि तूझे चांद पर ले जाऊंगा, मगर ये सिरफिरे वैज्ञानिक तो सचमुच सेंटी हो गए और अब चांद की सैर कराने उतारु हो गए हैं। पिछली बार जब चांद पर जमीन खरीदने की बात आई तो मैंने अपनी प्रियतमा से कह दिया कि सब फर्जी है पर इस बार तो वो चांद पर जाने की अर्जी लेकर बैठ गई है। वैसे ये उसकी अर्जी नहीं असल में मर्जी है और मेरी जीवन का मर्ज। खैर मैंने इस बार फिर से उसे नेताजी की तरह बोल बचन देते हुए कह दिया है कि मंगल पर जाएंगे। आशा है कम से कम १५-२० साल तक मंगल पर जाने का कोई पैकेज नहीं आएगा। वैज्ञानिक शांत रहेंगे और मेरे जीवन में भी शांति कायम रहेगी।


मेरी चिंता तो खत्म हो गई लेकिन जैसा कि आप जानते हैं मैं चिंतक किस्म का हूं। अपनी चिंता खत्म हुई तो क्या पूरे जमाने की चिंता करने का अघोषित ठेका तो मैंने भगवान से लिया हुआ है वो भी बिना टेंडर भरे। सेटिंग है अपनी। बस अब जमाने की चिंता करने में जुटा हूं। वैसे चिंतक गुण के मामले में  खुद को अमेरिका की टक्कर का मानता हूं। दूसरे के फटे में टांग घुसाना मेरी प्रमुख खूबियों में एक है। और अगर फटा न तो हम पहले फाड़ते हैं, फिर अपनी टांग घुसाते हैं। चांद पर जाने की खबर क्या निकली चांद के प्यारे चांद पर पहुंचने बेताब हो गए।


इन्हीं चांद के प्यारों में से एक थे हमारे कवि मित्र उन्माद कुमार ‘बेताब’। बेताबजी हमें सड़क पर मिले। उनके उन्मादी चेहरे पर चांद पर जाने की बेताबी साफ दिख रही थी। मैंने तपाक से कहा- चांद पर मत जाना चांद के प्यारे। वो बोले- क्यों। मैंने कहा- पहले तो चांद पर पहुंच पाओगे नहीं आप। वो बोले मैं धन का गरीब हूं मगर कलम का अमीर हूं। मेरे अप्रकाशित कविताओं के इतने पन्ने हैं कि अगर क्रमबद्ध तरीके से जमाऊं तो यूं ही चांद तक हाईवे बना दूंगा। आप लोगों ने तो हमें और हमारी कविताओं को हमेशा हल्के में लिया है, इसलिए जा रहे हैं चांद पर पूरी तरह हलके होने। वहां तो वैसे भी हर चीज ८ गुना हल्की हो जाती है। मैंने कहा- बेताबजी, आपने जुगाड़ तो अच्छा बिठाया है लेकिन भूलकर भी चांद पर न जाना, आप क्या मैं तो कहता हूं कोई कवि चांद पर न जाए। गलती से पहुंच भी गये तो चांद आपको वहीं गड्ढे में पाट देगा।


बेताबजी ने अचरज से पूछा- ऐसा क्यों? मैंने कहा- चांद बहुत खफा है आप लोगों से, कोई उसे अप्सरा बता देता है, कोई सुंदरता की मूरत, तो कोई चंदा मामा, तो कोई दागदार बदसूरती। जिसके मन में जो आता चांद को वही बना देता है, बिना पूछे उसका लिंग परिवर्तन कर दिया जाता है। खुद को सुंदरता की मूरत कहलाए जाने पर चांद शरमा ही रहा होता है कि कोई दूसरा कवि उसे मामा पुकारने लगता है। उस पर जो थोप दिया गया, वो उसे भारतीय जनता की तरह चुपचाप सहता गया। लेकिन अब नहीं, अब आंदोलनों की बयार छाई हुई है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन और चांद अगेंस्ट इमेजिनेशन। चांद पर इतनी गड्ढे यूं ही नहीं पड़े। ये जो आप कवि महाशय चांद पर अपनी कल्पना के हवाईजहाज छोड़ते हैं, ये क्रैश लैंडिंग होकर वहीं गिरते हैं और गड्ढे बनाते हैं। चांद को तो बेसब्री से इंतजार है कि कोई कवि वहां आए और उसे गड्ढे में गाड़कर वो अपनी गड्ढे पाटे। इतना सुनता था और बेताबजी बेताब होकर अपने घर को भागे।


इधर मुझे बेचारेलाल जी दिखाई दिए दुखी मुद्रा में। मैंने जाते ही पूछा क्या हुआ बेचारेलालजी। अपनी दुखित मुद्रा बरकरार रखते हुए बेचारेलाल जी बोले- महंगाई सातवें आसमान पर हैं, सब चीजें सातवें आसमान पर है चाहे खाने के दाम हो या सोने के। समझ नहीं आता कैसे इनकी हासिल करूं, ये तो मेरी पहुंच से बहुत दूर हो गए हैं। मुझे मौका बिलकुल उपयुक्त लगा अपना वैज्ञानिक ज्ञान दिखाने का, मैंने तुरंत मोटा चश्मा चढ़ाया और कहा- देखिए यहां भौतिकी का नियम लागू होता है- गुरुत्वाकर्षण बल का। पहले आप भी जमीन पर थे और सामानों के दाम भी, सब लेवल में था। आप जमीन पर ही रहे… मगर दाम थोड़ा ऊपर उठी। दाम थोड़ा और उपर उठी…. मगर आप तब भी जमीन पर रहे। अब दाम सातवें आसमान पर है और आप वही के वही जमीन पर। तो बस अब आप कुछ जुगाड़ बिठाइए, गुरुत्वाकर्षण बल के खिलाफ जाइए और पहुंच जाइए चांद पर…. पृथ्वी में आसमान की पांच परतें हैं… ये हो गए पांच आसमान…. दो आसमान और आगे जाइए आ गया सातवां आसमान। यहां आपको महंगाई डायन व आपकी मूलभूत चीजें दिख जाएंगी। मगर आप यहां रुकना मत.. यहां से १० किलोमीटर और आगे जाना और चांद पर उतर जाना। चांद पर आप रहेंगे तो ये सातवें आसमान की चीजें आपके नीचे ही रहेंगी और १५-२० साल बाद अगर महंगाई बढ़ते-बढ़ते चांद तक पहुंच भी गई तो भी ये आपकी पहुंच से बाहर नहीं होंगी। इतना सुनते ही पिछले आधे घंटे से दुखित मुद्रा में दिख रहे बेचारेलाल प्रसन्न हो आगे बढ़ लिए। लोग कहते हैं निंदक नियरे राखिए, मैं तो कहूंगा चिंतक नियरे राखिए… वो भी मुझ जैसा।


खैर अब आगे बढ़ा तो नेताजी दिख गए उदासी में। नेताजी को उदास देखना हमें बिलकुल गवारा न हुआ। भारत में एक इनकी ही तो प्रजाति प्रसन्न मु्द्रा में रहती है, इनको भी किसी ने नजर लगा दी। मैंने पूछा- क्या हुआ नेताजी। नेताजी बिलखते हुए बोले- जिंदगी नीरस हो गई है….। इतने घोटाले किए, इतने भ्रष्टाचार किए…किसी को नहीं छोड़ा। अब तो धरती पर कुछ रहा ही नहीं जिसमें घोटाला कर सकूं, जिंदगी नीरस हो गई है। घोटाला भी करता हूं तो लोग ध्यान नहीं देते…. जैसे घोटाला न हुआ कोई सब्जी-भाजी हो गया। हमारे मेहनत की तो कोई वैल्यू ही नहीं रह गई है। इतना सुनते ही मेरी आंखें भर आई…. मैंने कहा- बस बहुत हो गया… आप सच्चे चांद के प्यारे हैं। आप चांद पर जाइए… वहां जाकर इंधन घोटाला कीजिए। जो भी चांद घूमने आए.. उसकी वापसी का इंधन पी जाइए। चांद के १००-१५० गड्ढों पर अवैध कब्जा कर लीजिए। नेताजी ने मेरी सुझाव लपका और चांद जाने वाली अंतरिक्ष यान लपकने चल दिए।


इतने लोगों को चांद पर लेक्चर देकर हम खुश बहुत थे। पर अब भी दो लोग खुश नहीं थे। एक तो चिंतक गुण में हमारी टक्कर वाला विदेशी ‘अमेरिका’ व दूसरी हमारी देसी गर्ल.. हमारी प्रियतमा।  इतने लोगों को हमने चांद पर जाने के लिए उत्प्रेरित कर दिया तो अमेरिका घबरा गया कि अब तक तो बस ३ अमेरिकी ही चांद पर पहुंच पाए थे… इसके बस चला तो ये तो १० प्रतिशत भारतीयों को वहीं बसा देगा, फिर अमरीकियों का नामलेवा कौन होगा। इसलिए अब अमेरिका हमारे पीछे लग गया है। और दूसरी हमारी प्रियतमा, जो वैसे ही हमारे पीछे लगी रहती है…अब और पीछे पड़ गई है। क्योंकि किसी ने उसको बता दिया कि मंगल पर १५-२० साल तक जाने का कोई चांस नहीं है। और अब वो फिर पीछे पड़ गई है अपनी चांद पर जाने की अपनी अर्जी लेकर… मतलब मर्जी लेकर… मतलब हुक्म लेकर…। अब मुझे जरुरत है एक चिंतक की, एक शुभचिंतक की, एक महाचिंतक की…..कोई है।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

361 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashishgonda के द्वारा
July 19, 2012

प्रिय मित्र! सभी ने लेख बड़ी मुस्कराहट से पढ़ा होगा, इसका मुझे पक्का यकीं है मैंने तो आपका लेख अपने घर पर भी सबको पढाया सभी ने आपकी प्रशंशा की, सब आपके अगले लेख के इन्तजार में हैं.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 18, 2012

बेस्ट ब्लोगर आफ द वीक हेतु बधाई

    sumityadav के द्वारा
    July 19, 2012

    धन्यवाद प्रदीपजी। व्यंग्य को पसंद करने के लिए आपका आभार।

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
July 18, 2012

नमस्ते सुमित जी , सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर बनाने पर हार्दिक बधाई | वैसे चाँद पर तो जाने की मैं भी सोंच रहा हूँ और आपको साथ लेकर ही जाऊंगा |

    sumityadav के द्वारा
    July 19, 2012

    नमस्कार विवेकजी। क्या विवेकजी हमारी प्रियतमा क्या कम थी… जो आप भी चांद पर हमें ले जा रहे हैं…. अरे बस धरती के बोझों को किसी तरह चांद पर पहुंचाने का इंतजाम कीजिए, ये पृथ्वी ऐसे ही जीने लायक जगह बन जाएगी…हा..हा..हा…।

D33P के द्वारा
July 17, 2012

सुमित जी, बेस्ट ब्लॉगर बनने की बधाई

    sumityadav के द्वारा
    July 19, 2012

    धन्यवाद दीप्तिजी। व्यंग्य को पसंद करने एवं कमेंट के लिए आपका आर्दिक आभार।

sinsera के द्वारा
July 15, 2012

सुमित जी, बेस्ट ब्लॉगर बनने की बधाई तो ले ही लीजिये लेकिन लगता है चाँद कि छत पर भी अब ओजोन लेयर में छेद होने वाला है…:-) :-)

    sumityadav के द्वारा
    July 19, 2012

    धन्यवाद सिनसेराजी। हां बिलकुल सही कहा आपने… अरे जब हमने पृथ्वी के ओजोन लेयर में छेद कर दिया तो फिर क्या चांद क्या चीज़ है..।

ashokkumardubey के द्वारा
July 15, 2012

मुझे अपना शुभचिंतक मानिये और चाँद की बात चाँद पर जाकर ही कीजिये अपनी प्रियतमा को समझाईये बस अगल टिकट हमरा होगा जब R A C clear हो जायेगा क्यूँ कही न ठीक बात , बहुत अच्छा ब्यंग लेख आपको बधाई

    sumityadav के द्वारा
    July 15, 2012

    नमस्कार अशोक जी। आपकी सलाह बिलकुल सही है पर अब मामला उलटा पड़ गया है। वो रूठी हुई है और अब हम उसके पीछे भाग रहे हैं… आशा है दोड़ते-दौड़ते ही चांद तक पहुंच जाएं।… रूठे को मनाने का कोई तरीका हो, तो वो भ बताइएगा। आपके छोटी भाई की गुजारिश है। मेरे ब्लाग पर आने के लिए व व्यंग्य को पसंद करने के लिए आपका धन्यवाद ।

Dr. Aditi Kailash के द्वारा
July 15, 2012

सुमित ji, बहुत-बहुत बधाइयाँ……..

    sumityadav के द्वारा
    July 15, 2012

    धन्यवाद अदितिजी। बहुत लंबे समय बाद करीबन डेढ़-दो वर्ष बाद आपको इस मंच पर पाकर अच्छा लगा। उत्साहवर्धन के लिए आपका आभार।

rajesh के द्वारा
July 14, 2012

ब्लागर आफ वीक बनने पर हार्दिक बधाई .बेहतरीन लेख

    sumityadav के द्वारा
    July 14, 2012

    व्यंग्य को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार राजेशजी।

jalaluddinkhan के द्वारा
July 13, 2012

चाँद के बहाने देश की गंभीर समस्या पर चर्चा इस रचना की सार्थकता सिद्ध करती है.हल्के-फुल्के ढंग से आपने गंभीर मुद्दे उठाये.बेहतरीन लेखन और बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक बनने के लिए बधाई.

    sumityadav के द्वारा
    July 14, 2012

    धन्यवाद खानजी। क्या करें इस देश में इतनी समस्याएं हैं… नेता तो गंभीर नहीं है…..इसलिए हम ही उन पर व्यंग्यबाण छोड़कर चुटती ले लेते हैं।

alkargupta1 के द्वारा
July 13, 2012

अच्छा व्यंग्य किया है आपने सुमित जी सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर बनने पर हार्दिक बधाई

    sumityadav के द्वारा
    July 14, 2012

    धन्यवाद अल्काजी। व्यंग्य को पसंद करने के लिए आपका आभार।

    Mattingly के द्वारा
    July 26, 2016

    FWIW, I got a math degree. I work as a programmer and I rarely use most of what I learned. ‘You have to know mashimatect’, is what they tell kids now. I’d like to see empirical evidence that it would help most students in a practical way (aside from furthering their education) in their future. You HAD to know Greek and Latin and one point as well. It’s not about the subject matter.

Chandan rai के द्वारा
July 13, 2012

सुमित मित्र , मे आपकी लेखनी का हमेशा ही फैन रहा हूँ , आप इक जबरदस्त लेखक है ब्लागर ऑफ़ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    धन्यवाद चंदन भाई। धन्यवाद बस सब आपके प्रोत्साहन का ही नतीजा है..। हां…खुशी तो है…. कि मुझे ब्लॉगर आफ द वीक बनने लायक पाया गया।

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
July 12, 2012

बहुतेरे मिल जाएंगे….एक बार नज़रें घुमा के तो देखिये….. ब्लागर ऑफ़ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई…..

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    शुक्रिया अजयजी। बस आप जैसे भाई लोग… मिल जाएं तो मेरी मदद के लिए और क्या चाहिए….। हा..हा..हा….

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
July 12, 2012

मित्र सुमित, तुम्हारी कल्पना शक्ति का कोई जवाब नहीं, यह लेख पढ़कर बहुत आनंद आया… ब्लौगर ऑफ द वीक चुने जाने के लिए बहुत बहुत बधाई. कभी मेरे ब्लॉग पर भी पधार कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना…

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    बस अनिल भाई हम भी थोड़े बहुत कल्पना के घोड़े दौड़ाते रहते हैं….. और आप लोग के प्रोत्साहन से गति प्राप्त करते रहते हैं। बिलकुल आपके ब्लॉग को पढ़ना मेरी खुशकिस्मती रहेगी। सालभर पहले मैं भी जागरण जंक्शन परिवार के सक्रिय सदस्यों में से एक था। लेकिन अब काम की व्यस्तता के चलते यहां अब थोड़ा कम आना होता है….।

allrounder के द्वारा
July 12, 2012

सुमित जी, अच्छे व्यंग और श्रेष्ठ ब्लॉगर चुने जाने की हार्दिक बधाई आपको !

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    नमस्कार सचिन भैया। सब आपकी संगति का असर… है। आपको छक्का-जड़ता देखकर हमने भी काफी कुछ सीखा है…..। धन्यवाद आपका।

shivesh singh rana के द्वारा
July 12, 2012

बधाई हो मित्र……

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    धन्यवाद शिवेश जी….। आपकी ये बधाईयां ही और बेहतर लिखने प्रेरित करेंगी।

R K KHURANA के द्वारा
July 12, 2012

प्रिय सुमित जी, ब्लागर ऑफ़ दी वीक बनाने पर बधाई और मेरा आशीर्वाद ! राम कृष्ण खुराना

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    प्रणाम खुराना सर। बस आपका आशीष ही है जिसकी वजह से मेरी लेखनी में सुधार हुआ… है। आपको, सचिन भैया, मिश्राजी आदि सभी ब्लॉगरों को मैंने पढ़ा…जिससे बहुत कुछ सीखने मिला। एक बार फिर से आपका धन्यवाद।

dineshaastik के द्वारा
July 12, 2012

समित जी नमस्कार, बहुत अच्छा सन्दर  व्यंग..

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    व्यंग्य को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार दिनेशजी। आप इस मंच के प्रमुख सदस्यों में से एक है। आपके प्रोत्साहन मुझे प्रेरित करेगा कि और बेहतर लिख सकूं।

Meenakshi Srivastava के द्वारा
July 11, 2012

sumityadav जी, सचमुच आपने अपने तरीक़े से अपने समाज के अलग-२ चरित्र का वर्णन किया , अच्छा लगा . बहुत-२ बधाई. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    sumityadav के द्वारा
    July 13, 2012

    नमस्कार मीनाक्षीजी। सबसे पहले आपका धन्यवाद की आपने व्यंग्य को पसंद किया। वैसे चांद के प्यारों में से हम भी एक है…लेकिन बस ख्यालों में…।


topic of the week



latest from jagran